नयी दिल्ली, 18 जनवरी संयुक्त अरब अमीरात (यूएई), ऑस्ट्रेलिया के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और राज्यों तथा विदेशों में भारतीय दूतावासों की भागीदारी से देश के निर्यात को बढ़ावा देने में मदद मिलेगी। भारतीय पौधरोपण प्रबंधन संस्थान (आईआईपीएम) के निदेशक राकेश मोहन जोशी ने बुधवार को यह बात कही।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे समय में जब विकसित देशों की अर्थव्यवस्था मंदी का सामना कर रही है, भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वस्थ वृद्धि दर्ज कर रही है और निर्यात इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जोशी ने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में देश अपनी निर्यात प्रोत्साहन रणनीतियों के लिए जिला स्तर पर भी सरकार और कंपनियों के अधिकारियों और दुनियाभर में विदेशी दूतावासों को सक्रिय रूप से साथ ले रहा है, जिससे भारत के निर्यात में सतत वृद्धि हुई है।’’
वाणिज्य मंत्रालय के तहत बेंगलुरु स्थित आईआईपीएम, कृषि-बागवानी क्षेत्र के अंशधारकों के लिए उद्योग की आवश्यकता-आधारित क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करता है।
उन्होंने कहा कि भारत के नीतिगत उपायों और संस्थागत मजबूती ने निर्यात को बढ़ावा दिया, जो वर्ष 2021-22 में 422 अरब डॉलर के सर्वकालिक उच्चस्तर को छू गया।
जोशी ने कहा, ‘‘भारत अपने मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) का सक्रिय रूप से मूल्यांकन करने और अपनी अर्थव्यवस्था को लाभ पहुंचाने के लिए नए समझौते करने की प्रक्रिया में भी है।’’
हालांकि, उन्होंने कहा कि अपनी वृद्धि की गति की गति को बनाए रखने के लिए, भारत को सावधानीपूर्वक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए अपनी सख्त मौद्रिक नीतियों और आर्थिक गतिविधियों पर इसके प्रभाव को रोकने के लिए संतुलन बनाने की जरूरत है।
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