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‘निहित स्वार्थ से धारणा बनाई जा रही है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक समुदाय का उत्पीड़न हो रहा है’

एक बयान के मुताबिक, सभी मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि सरकारों ने कोरोना वायरस से निपटने में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं पर हमला करने वालों या सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करके बिल्कुल सही किया, भले ही वह किसी भी समुदाय के हों।

‘निहित स्वार्थ से धारणा बनाई जा रही है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में एक समुदाय का उत्पीड़न हो रहा है’
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नयी दिल्ली, 11 मई पूर्व न्यायाधीशों और सेवानिवृत्त नौकरशाहों सहित प्रमुख नागरिकों के एक समूह ने आरोप लगाया है कि "कुछ निहित स्वार्थों" के कारण यह धारणा बनाई जा रही है कि कोरोना वायरस के खिलाफ लड़ाई में एक विशेष समुदाय को कथित रूप से परेशान किया जा रहा है और दावा किया कि ऐसी कोशिशों का मकसद भारत को "बदनाम" करना है।

एक बयान के मुताबिक, सभी मुख्यमंत्रियों को लिखे पत्र में उन्होंने कहा कि सरकारों ने कोरोना वायरस से निपटने में अग्रिम पंक्ति के कार्यकर्ताओं पर हमला करने वालों या सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरे में डालने वालों के खिलाफ कार्रवाई करके बिल्कुल सही किया, भले ही वह किसी भी समुदाय के हों।

183 नागरिकों के समूह में उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अनिल दवे और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग के पूर्व प्रमुख संजीव त्रिपाठी समेत अन्य शामिल हैं।

इस तरह के आरोप हैं कि कोरोना वायरस के प्रकोप को लेकर कुछ दक्षिणपंथी समूहों ने मुस्लिमों को निशाना बनाया। इसी की प्रतिक्रिया में इस पत्र को देखा जा रहा है।

पत्र में उन्होंने राज्य सरकारों के साथ केंद्र की समन्वित कार्रवाई का सर्मथन करते हुए कहा कि वे स्वास्थ्य सेवा और खाद्य आपूर्ति का प्रभावी ढंग से प्रबंधन कर रहे हैं और उनके प्रयास से इस बीमारी से जितनी मौतें हो सकती थीं, उससे काफी कम संख्या में हुई हैं।

नागरिकों ने कहा कि पूरी दुनिया महामारी के खिलाफ एकजुट होकर लड़ने के लिए भारत की "प्रशंसा" कर रही है।

उन्होंने कहा, "हमारा समूह उस तरीके से काफी परेशान है, जिसमें कुछ निहित स्वार्थों वाले मुख-पत्र लगातार यह धारणा बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि राज्यों में एक विशेष समुदाय का व्यापक उत्पीड़न हुआ है।"

उन्होंने ऐसे प्रयासों पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, " हमारा समूह कुछ तत्वों द्वारा भारत विरोधी प्रचार का विरोध करता है, जो देश के मजबूत सामाजिक ताने-बाने को छिन्न करने के लिए एक बड़ी साजिश है और भारत और भारतीयों को गलत आरोप लगाकर दुनियाभर में बदनाम करना है। "

उन्होंने मुख्यमंत्रियों से यह सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्रवाई करने का आग्रह किया कि "दुष्ट राष्ट्र-विरोधी एजेंडा महामारी के खिलाफ लड़ाई में स्वास्थ्य कर्मियों, स्वच्छता कर्मियों, लोक सेवकों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के मनोबल को तोड़ने के अपने उद्देश्यों में सफल नहीं होना चाहिए।"

बयान में कहा गया है, "अत्यधिक गंभीरता की बात यह है कि कुछ भारत विरोधी तत्वों के मुखपत्रों ने बिना सत्यापन के फर्जी भारत विरोधी खबरें छापी हैं। इसमें भारत के खिलाफ अंडर कवर ऑपरेशन के लिए कई देशों से पाकिस्तान और आईएसआई द्वारा चलाए जा रहे ट्विटर हैंडल से जानकारी लेना शामिल है। "

समूह ने कहा कि उनके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

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(The above story first appeared on LatestLY on May 11, 2020 10:39 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).