देश की खबरें | पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने कोयला खदान के लिए पेड़ों की कटाई का विरोध कर रहे ग्रामीणों का समर्थन किया
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रायगढ़, तीन जुलाई छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बृहस्पतिवार को राज्य के रायगढ़ जिले के तमनार तहसील का दौरा किया और क्षेत्र में कोयला खदान परियोजना के लिए पेड़ों की कटाई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों का समर्थन किया।
बघेल ने दावा किया कि स्थानीय ग्राम सभा की अनुमति के बिना वनों की कटाई की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर आदिवासियों के अधिकारों को दबाने और कोयला खदानों को उद्योगपति (गौतम) अदाणी को सौंपने का आरोप लगाया।
गारे पाल्मा सेक्टर 2 कोयला ब्लॉक के संचालन के लिए पिछले सप्ताह तमनार तहसील के मुडागांव और सरिटोला गांवों के बीच एक वन क्षेत्र में पेड़ों की कटाई शुरू की गई थी।
यह खदान महाराष्ट्र राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड (महाजेनको) को आवंटित है और एमडीओ (खान डेवलपर सह संचालक) अदाणी समूह के पास है।
कांग्रेस पार्टी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री बघेल ने 20 से अधिक विधायकों और कार्यकर्ताओं के साथ रायगढ़ के तमनार पहुंचकर ग्रामीणों के आंदोलनों का समर्थन किया।
बघेल ने कहा कि राज्य की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा को अदाणी समूह को सौंपने की होड़ लगी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि ग्राम सभा की अनुमति के बगैर पेड़ काट कर खनन शुरू किया जा रहा है। विरोध कर रहे आदिवासियों का कहना है उन पर अत्याचार किया जा रहा। यह सरकार आदिवासियों के अधिकारों को दबा कर उद्योगपति अदाणी को कोयला खान सौंपना चाहती है।
बघेल ने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद (दिसंबर 2023 में) पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व के दबाव में राज्य के कोयला खनन की बंदरबांट शुरू हो गयी।
उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार ने अदाणी समूह के हितों को सवंर्धित करने के लिये राज्य के जल, जंगल, जमीन खनिज संपदा को उसे सौंपना शुरू कर दिया है। इसके पहले हसदेव अरण्य क्षेत्र में वनों की अंधाधुंध कटाई शुरू की गयी थी।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने छत्तीसगढ़ विधानसभा में 2022 में प्रस्ताव पारित कर हसदेव अरण्य, तमोर पिंगला और कोरबा के हाथी रिजर्व क्षेत्र के वनों में कोयला ब्लॉक आवंटन रद्द करने का संकल्प लिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद अदाणी समूह को फायदा पहुंचाने के लिए हसदेव से लेकर तमनार तक पेड़ों की कटाई शुरू की गई है।
सं संजीव
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