देश की खबरें | कोविड के दौरान छात्रों को खाद्य सुरक्षा भत्ता दिया गया, अब मध्याह्न भोजन दे रहे: दिल्ली सरकार

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय को शहर की सरकार ने बताया कि जब कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूल बंद थे, तब छात्रों के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ते के तौर पर निधि जारी की गई थी।

नयी दिल्ली, एक फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय को शहर की सरकार ने बताया कि जब कोविड-19 वैश्विक महामारी के कारण स्कूल बंद थे, तब छात्रों के लिए खाद्य सुरक्षा भत्ते के तौर पर निधि जारी की गई थी।

सरकार ने अदालत को बताया कि इस समय सरकारी विद्यालयों में बच्चों को मध्याह्न भोजन (मिड-डे-मिल) मुहैया कराया जा रहा है, क्योंकि कोविड-19 संबंधी प्रतिबंध अब लागू नहीं हैं।

सरकार ने यह दलील 2020 की उस लंबित याचिका के जवाब में दिया, जिसमें कोविड-19 के दौरान लागू लॉकडाउन के समय पात्र छात्रों को पका हुआ मध्याह्न भोजन या खाद्य सुरक्षा भत्ता देने का दिल्ली सरकार को निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने सरकार द्वारा किये गये इंतजाम पर गौर करते हुए कहा कि इस मामले में और कोई आदेश पारित किए जाने की आवश्यकता नहीं है। अदालत ने इसी के साथ याचिका का निस्तारण कर दिया।

याचिकाकर्ता गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) ‘महिला एकता मंच’ ने कहा कि मध्याह्न भोजन या खाद्य सुरक्षा भत्ता मुहैया कराने का मकसद वैश्विक महामारी के दौरान गरीब बच्चों की रोग प्रतिरोधी क्षमता को मजबूत करना था।

दिल्ली सरकार के शिक्षा निदेशक ने एक हलफनामे में बताया कि मार्च, 2020 से मध्याह्न भोजन के बदले प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिए खाद्य सुरक्षा भत्ते के भुगतान के रूप में धनराशि वितरित की गई थी।

हलफनामे में कहा गया कि केंद्र ने अब तक 2020-21 के लिए तदर्थ भुगतान के रूप में 27 करोड़ रुपये जारी किए हैं और केंद्र सरकार द्वारा दिल्ली सरकार को आवंटित कुल धनराशि 106 करोड़ रुपये है।

इसमें कहा गया है कि पहली से आठवीं कक्षा तक के स्कूली बच्चों के लिए मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराया जाता है। जुलाई 2019 के परिपत्र के अनुसार, राज्य सरकारों को खाना पकाने की लागत का 40 प्रतिशत वहन करना चाहिए और केंद्र सरकार शेष खर्च वहन करे।

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