देश की खबरें | पढ़ाई पर ध्यान दो, संवैधानिक उपायों की मांग करने पर नहीं: न्यायालय ने छात्र से कहा
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नयी दिल्ली, 20 सितंबर देशभर में स्कूलों को फिर से खोले जाने की मांग कर रहे 12वीं कक्षा के 17 वर्षीय छात्र को उच्चतम न्यायालय ने सलाह दी कि वह संवैधानिक उपायों की मांग करने के बजाय पढ़ाई पर ध्यान दे।
शीर्ष अदालत ने कहा कि वह इस याचिका को प्रचार का हथकंडा नहीं कहेगी लेकिन यह एक भ्रमित याचिका है और बच्चों को ऐसे मामलों में शामिल नहीं होना चाहिए।
न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना की पीठ ने याचिका पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि दिल्ली का छात्र राज्य सरकार के सामने अपनी मांग रख सकता है।
पीठ ने वकील रवि प्रकाश महरोत्रा से कहा, ‘‘अपने मुवक्किल से कहिए कि स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान दे और संवैधानिक उपायों की मांग करने में समय नहीं गंवाए।’’
पीठ ने कहा, ‘‘अनुच्छेद 21ए के लागू होने के बाद, इसने राज्य सरकारों को 6 से 14 साल के बीच के सभी बच्चों को मुफ्त और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने के लिए बाध्य किया है। आप देखते हैं कि अंतत: सरकारें जवाबदेह हैं। वे बच्चों के स्कूलों में वापस जाने की आवश्यकता के बारे में भी चिंतित हैं। यही स्कूलों का उद्देश्य है। हम न्यायिक फरमान के तहत यह नहीं कह सकते कि आपको अपने बच्चों को स्कूल वापस भेजना चाहिए और इस बात से बेखबर नहीं रह सकते कि कि क्या खतरे हो सकते हैं।’’
उसने कहा कि देश अभी कोविड की दूसरी लहर से बाहर निकला है और संक्रमण बढ़ने की आशंका अभी समाप्त नहीं हुई है।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं यह नहीं कह रहा हूं कि यह अनिवार्य रूप से होगा ही या यह उसी तरह विनाशकारी होगा। सौभाग्य से, अब हमारे पास ऐसी रिपोर्ट हैं जो बताती हैं कि संक्रमण उस प्रकृति का नहीं होगा। टीकाकरण हो रहा है लेकिन बच्चों का टीकाकरण नहीं हो रहा है, यहां तक कि कई शिक्षकों को भी टीका नहीं लगा होगा। हम यह नहीं कह सकते कि सभी बच्चों को स्कूल भेजें। ये शासन से जुड़े मुद्दे हैं।’’
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