विदेश की खबरें | पिछले साल सर्वाधिक बच्चों को डीपीटी टीके नहीं लगाने वाले देशों में भारत सहित पांच देश शामिल: संरा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और फिलीपीन 2021 में ऐसे पांच देश रहे हैं, जहां सर्वाधिक संख्या में बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी से बचाव के लिए डीपीटी टीके नहीं लगे। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने यह जानकारी दी।

संयुक्त राष्ट्र , 15 जुलाई भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और फिलीपीन 2021 में ऐसे पांच देश रहे हैं, जहां सर्वाधिक संख्या में बच्चों को डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी से बचाव के लिए डीपीटी टीके नहीं लगे। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने यह जानकारी दी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और यूनिसेफ द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक गत 30 वर्षों में वैश्विक स्तर पर बच्चों के टीकाकरण में उल्लेखनीय कमी आई है।

आंकड़ों में कहा गया है कि डिप्थीरिया, टेटनस और काली खांसी (डीपीटी3) से बचाव के लिए तीन खुराक लेने वाले बच्चों की संख्या में कमी विभिन्न देशों में आई है। इन बीमारियों से बचाव के लिए टीके लेने वाले बच्चों की संख्या में 2019 के मुकाबले 2021 में पांच प्रतिशत की कमी आई।

आंकड़ों के मुताबिक, ‘‘इसका नतीजा रहा है कि 2.5 करोड़ बच्चों को 2021 में नियमित टीकाकरण कार्यक्रम के तहत डीपीटी की एक या इससे अधिक खुराक नहीं लगी।’’

आकंड़ों के मुताबिक इन 2.5 करोड़ बच्चों में 2021 के दौरान 1.8 करोड़ बच्चों को डीपीटी की एक भी खुराक नहीं लगी। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों ने बताया कि इसमें निम्न और मध्यम आय वर्ग के देशों के बच्चों की संख्या अधिक है, जिनमें भारत, नाइजीरिया, इंडोनेशिया, इथियोपिया और फिलीपीन में ऐसे बच्चों की संख्या सर्वाधिक है।

रिपोर्ट के मुताबिक विश्व के प्रत्येक क्षेत्र में टीकाकरण में कमी आई है। पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में डीपीटी टीकाकरण में गत दो साल के दौरान नौ प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।

डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक डॉ.टेड्रोस ए. घेब्रेयेसस ने कहा,‘‘कोविड-19 से निपटने की योजना खसरा, निमोनिया और डायरिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाव के टीकाकरण के साथ-साथ चलनी चाहिए।’’

यूनिसेफ की कार्यकारी निदेशक कैथरीन रसेल ने कहा,‘‘यह बच्चों के स्वास्थ्य के लिए खतरे की घंटी है। हम इस पीढ़ी के टीकाकरण में सबसे बड़ी कमी देख रहे हैं।’’

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