जरुरी जानकारी | फिच ने आठ साल बाद भारत का परिदृश्य घटाकर नकारात्मक किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने आठ साल में पहली बार भारत का आर्थिक परिदृश्य ‘स्थिर’ से घटाकर बृहस्पतिवार को ‘नकारात्मक’ कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने देश की आर्थिक वृद्धि की संभावना को कमजोर किया है और सरकार के समक्ष बढ़ते कर्ज से जुड़ा जोखिम उपस्थित हो गया है।

नयी दिल्ली, 18 जून क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने आठ साल में पहली बार भारत का आर्थिक परिदृश्य ‘स्थिर’ से घटाकर बृहस्पतिवार को ‘नकारात्मक’ कर दिया। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि कोविड-19 महामारी ने देश की आर्थिक वृद्धि की संभावना को कमजोर किया है और सरकार के समक्ष बढ़ते कर्ज से जुड़ा जोखिम उपस्थित हो गया है।

हालांकि, फिच ने भारत की रेटिंग को ‘बीबीबी नकारात्मक’ बनाये रखा है। यह निवेश योग्य सबसे निचली रेटिंग है।

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फिच से पहले मूडीज ने भी इस महीने की शुरुआत में देश की रेटिंग को कम करके सबसे निचली निवेश श्रेणी ‘बीएए2’ में रख दिया था। ऐसा 22 साल में पहली बार हुआ।

रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘‘ फिच रेटिंग्स ने भारत के दीर्घावधि के परिदृश्य को स्थिर से बदलकर नकारात्मक कर दिया है। भारत की रेटिंग ‘बीबीबी माइनस’ बरकरार रखी गयी है।’’

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फिच का अनुमान है कि देश की अर्थव्यवस्था में 31 मार्च 2021 को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के दौरान पांच प्रतिशत का संकुचन आयेगा। इसकी वजह देश में 25 मार्च से लागू लॉकडाउन के कारण बड़े अनुपात में करोबार का लम्बे समय तक बंद रहना है। हालांकि, एजेंसी का मानना है कि देश की अर्थव्यवस्था 2021-22 में फिर से सुधरकर 9.5 प्रतिशत की दर से वृद्धि करेगी।

फिच ने अपने बयान में कहा, ‘‘कोरोना वायरस संकट ने देश की वृद्धि की संभावना को कमजोर किया है। इसी के साथ सरकार पर कर्ज का ज्यादा बोझ पड़ने का जोखिम भी बढ़ा है। अर्थव्यवस्था के बाद में उबरने की मुख्य वजह आधार का कम रहना होगा।’’

एजेंसी ने भारत के लिये दीर्घकालिक विदेशी मुद्रा जारीकर्ता डिफॉल्ट रेटिंग को नकारात्मक से बदलकर स्थिर कर दिया।

फिच ने इससे पहले 2012 में भारत की अर्थव्यवस्था का परिदृश्य स्थिर से घटाकर नकारात्मक किया था। हालांकि, एक साल बाद ही यानी 2013 में उसने परिदृश्य पुन: स्थिर कर दिया था।

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