देश की खबरें | प्राथमिकी का यह मतलब नहीं कि मैं दोषी हूं : हिमाचल प्रदेश के मंत्री
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. एनएचएआई के दो अधिकारियों पर कथित रूप से हमला करने के आरोप में मामला दर्ज होने के एक दिन बाद बुधवार को हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि ‘‘प्राथमिकी का मतलब यह नहीं है कि मैं दोषी हूं।’’
शिमला, दो जुलाई एनएचएआई के दो अधिकारियों पर कथित रूप से हमला करने के आरोप में मामला दर्ज होने के एक दिन बाद बुधवार को हिमाचल प्रदेश के पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने आरोपों से इनकार किया और कहा कि ‘‘प्राथमिकी का मतलब यह नहीं है कि मैं दोषी हूं।’’
सिंह ने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) द्वारा सड़क निर्माण कार्यों में व्यापक अनियमितताओं का भी दावा किया और इसके अधिकारियों को "देश में सबसे भ्रष्ट" कहा।
कथित घटना सोमवार को उस समय हुई जब मंत्री शिमला में एक इमारत ढहने वाली जगह का निरीक्षण कर रहे थे और उन्होंने एनएचएआई के अधिकारियों को वहां बुलाया था। इमारत के मालिक ने एनएचएआई और फोर-लेन परियोजना में शामिल कंपनी पर लापरवाही का आरोप लगाया था।
मंत्री ने बुधवार को संवाददाताओं से कहा, ‘‘कुछ नहीं हुआ, कोई हमला नहीं हुआ। सोमवार को भट्टा कुफर में पांच मंजिला इमारत ढहने के मामले से लोगों का ध्यान हटाने का प्रयास किया गया। इमारत ढहने की घटना एनएचएआई की लापरवाही के कारण हुई।’’
मंगलवार को सिंह पर गलत तरीके से रोकने, जानबूझकर चोट पहुंचाने, लोक सेवक को अपने कर्तव्य से रोकने के लिए आपराधिक बल का प्रयोग करने तथा जानबूझकर अपमान करने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था।
मंत्री के खिलाफ प्राथमिकी एनएचएआई कर्मचारी अचल जिंदल की शिकायत पर दर्ज की गई थी, जो शिमला में फोर-लेन वाली एक परियोजना के प्रबंधक हैं। जिंदल ने आरोप लगाया था कि उन्हें और उनके साइट इंजीनियर योगेश को सिंह ने एक कमरे में बुलाया और उनकी पिटाई की।
मंत्री ने दावा किया कि मौके पर एनएचएआई के अधिकारी "मुस्कुरा रहे थे और कह रहे थे कि मुआवज़ा दिया जाएगा।" सिंह ने आरोप लगाया कि एनएचएआई के अधिकारियों का व्यवहार और शब्द "अनुचित" थे, जिसके बाद निवासियों ने अधिकारियों के खिलाफ़ शिकायत दर्ज कराई और मामले दर्ज किए गए।
उन्होंने पूछा, "यह केवल वित्तीय मुआवजे की बात नहीं है। यह मानव जीवन, उनके घरों और उनकी भावनाओं के बारे में है।"
मंत्री ने पूछा कि ढलान संरक्षण के लिए एनएचएआई को कितनी अतिरिक्त धनराशि प्राप्त हुई तथा उस धनराशि का कितनी पारदर्शिता से उपयोग किया गया।
ठेकेदारों, केंद्रीय सरकारी एजेंसियों और एनएचएआई अधिकारियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाते हुए उन्होंने जनता की बार-बार की शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए वन, राजस्व और पर्यावरण विभागों की भी आलोचना की।
उन्होंने कहा कि शिमला-परवाणू, मंडी, कांगड़ा और जोगिंदरनगर जैसे क्षेत्रों में अवरोधक दीवारों के अपर्याप्त निर्माण के परिणामस्वरूप बार-बार भूस्खलन हो रहा है और इमारतें ढह रही हैं।
उन्होंने कहा, "मैं केंद्रीय सड़क मंत्री नितिन गडकरी से अनुरोध करूंगा कि वह यहां आएं और एनएचएआई के कार्यों को देखें।"
उन्होंने दावा किया कि अकेले शिमला जिले में उप मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और उपायुक्तों के पास 700 से अधिक शिकायतें दर्ज की गई हैं, फिर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
एनएचएआई के अधिकारियों पर "जघन्य हमले" की निंदा करते हुए केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने मंगलवार को 'फेसबुक' पर एक पोस्ट में कहा, "मैंने मामले का गंभीरता से संज्ञान लिया है और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से बात की है तथा सभी आरोपियों के खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई करने का आग्रह किया है।"
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(The above story first appeared on LatestLY on Jul 02, 2025 08:02 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

