जरुरी जानकारी | वित्त मंत्री ने विभिन्न मंत्रालयों से पूंजी व्यय में तेजी लाने को कहा

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नयी दिल्ली, 11 जुलाई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से पूंजी खर्च को निर्धारित लक्ष्य के मुकाबले अधिक करने तथा व्यवहारिक परियोजनाओं के लिये सार्वजनिक-निजी भागीदारी की संभावना टटोलने की कोशिश करने को कहा।

उन्होंने बुनियादी ढांचा रूपरेखा पर चर्चा के लिये वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के साथ बैठक के दौरान मंत्रालयों और उनके अधीन आने वाले केंद्रीय लोक उपक्रमों (सीपीएसई) से सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के बकाये का यथाशीघ्र निपटान करने का भी आग्रह किया।

बुनियादी ढांचा रूपरेखा पर यह वित्त मंत्री की मंत्रालयों तथा विभागों के साथ पांचवीं समीक्षा बैठक थी।

आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार बैठक में मंत्रालयों तथा उनके सीपीएसई के पूंजी व्यय, बजट घोषणाओं के क्रियान्वयन की स्थिति और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के उपायों पर चर्चा हुई।

विज्ञप्ति में कहा गया है, ‘‘मंत्रालयों और उनके सीपीएसई के पूंजीगत व्यय प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए, वित्त मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि महामारी के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिये बढ़ा हुआ पूंजीगत व्यय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा तथा मंत्रालयों को अपने पूंजीगत व्यय में तेजी लाने के लिए प्रोत्साहित किया।’’

मंत्रालयों से पूंजी व्यय निर्धारित लक्ष्य से अधिक करने का उद्देश्य लेकर चलने का आग्रह किया गया।

वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में 5.54 लाख करोड़ रुपये के पूंजी व्यय का प्रावधान किया गया है। यह 2020-21 के बजटीय अनुमान से 34.5 प्रतिशत अधिक है।

सीतारमण ने कहा कि हालांकि, बजटीय प्रावधानों से पूंजी व्यय में वृद्धि के प्रयासों को सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों द्वारा समर्थन दिया जाना है।

उन्होंने कहा कि बुनियादी ढांचे पर खर्च सिर्फ केंद्र सरकार का बजटीय खर्च नहीं है और इसमें राज्य सरकारों तथा निजी क्षेत्र द्वारा किया जाने वाला बुनियादी ढांचा खर्च शामिल है। इसमें अतिरिक्त बजटीय संसाधनों के माध्यम से सरकारी व्यय भी शामिल है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इसीलिए मंत्रालयों को नये तरीकों से वित्त पोषण के जरिये परियोजनाओं के लिये वित्त की व्यवस्था करने पर सक्रिय रूप से काम करना है और बुनियादी ढांचे के खर्च को बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को सभी प्रकार की सहायता प्रदान करना है।

उन्होंने मंत्रालयों से यह भी कहा कि वे व्यवहारिक परियोजनाओं के लिये सार्वजनिक-निजी भागीदारी की संभावना टटोले।

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