पंजाब के उद्योगों को प्रवासी मजदूरों के 'पलायन' की आशंका
उद्योग प्रतिनिधि इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि मजदूर अपने मूल स्थानों पर वापस चले जाते हैं तो संयंत्रों कैसे चालू होंगे।
चंडीगढ़, दो मई केंद्र द्वारा फंसे हुए मजदूरों को उनके घर वापस जाने की अनुमति देने के बाद पंजाब में उद्योगों को राज्य से प्रवासी मजदूरों के ‘‘पलायन’’ की आशंका सता रही है।
उद्योग प्रतिनिधि इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि मजदूर अपने मूल स्थानों पर वापस चले जाते हैं तो संयंत्रों कैसे चालू होंगे।
यूनाइटेड साइकिल एंड पार्ट्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डी एस चावला ने शनिवार को कहा, ‘‘हमें यह सुनकर दुख हुआ कि सरकार ने प्रवासी श्रमिकों को उनके घर वापस जाने की अनुमति दी है। यदि सरकार चाहती है कि हम अपनी इकाइयों को फिर शुरू करें, तो यह कैसे संभव हो सकता है।’’
उन्होंने कहा कि राज्य में जो भी प्रवासी मजदूर हैं, वे अपने मूल स्थानों पर लौट जाएंगे, क्योंकि सरकार ने उन्हें भेजने के लिए विशेष रेलगाड़ी चलाई है।
चावला ने कहा, ‘‘ जब प्रवासी मजदूर यह जानेंगे कि रेलगाड़ियों ने उन्हें ले जाना शुरू कर दिया है, तो जिन लोगों ने वापस जाने की योजना नहीं बनाई है, वे भी निश्चित रूप से राज्य से बाहर चले जाएंगे।’’
उद्योग जगत के नेताओं ने कहा कि अगर सरकार को प्रवासी मजदूरों को वापस जाने की अनुमति देनी है तो उद्योगों से परिचालन फिर शुरू करने के लिए क्यों कहा जा रहा है।
बीते दिनों राज्य के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इकाइयों ने गृह मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार फिर काम शुरू करने की योजना बनाई है।
केंद्र सरकार ने बुधवार को देश के विभिन्न हिस्सों में फंसे प्रवासी श्रमिकों, पर्यटकों, छात्रों और अन्य लोगों को कुछ सावधानी के साथ अपने-अपने गंतव्य पर जाने की अनुमति दी।
पंजाब में लगभग 10 लाख प्रवासी कामगार हैं, जिनमें अकेले लुधियाना में सात लाख प्रवासी श्रमिक हैं। प्रवासी मजदूरों में ज्यादातर बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड से हैं।
इस बीच लुधियाना के कपड़ा कारोबारियों ने कहा कि प्रवासी श्रमिकों के अपने घर वापस जाने में कोई समस्या नहीं है, क्योंकि उनकी इकाइयां ऑर्डर की कमी के कारण बंद हैं।
लुधियाना निटवियर एसोसिएशन के अध्यक्ष अजीत लाकड़ा ने कहा, ‘‘गर्मियों की मांग लॉकडाउन के कारण फंस गई है। शीतकालीन परिधान की मांग को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है। ऐसे में हम अपने कारखाने कैसे शुरू कर सकते हैं।’’
लाकड़ा ने कहा, ‘‘हमारे पास मांग और पैसा नहीं है। लुधियाना कपड़ा उद्योग के अधिकांश लोग अपनी इकाइयों को शुरू करने की स्थिति में नहीं हैं। अधिकांश कपड़ा और परिधान निर्माता खुश हैं कि वे (प्रवासी मजदूर) लौट जाएं, यदि वे बाद में वापस आ जाएं तो। इससे हमारा वित्तीय बोझ भी कुछ हद तक कम हो जाएगा।’’
इसके अलावा पंजाब के उद्योगों ने सरकार से वित्तीय राहत की मांग भी की है, जिसमें ब्याज में छूट और ऋण किश्त स्थगन शामिल हैं।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)