नयी दिल्ली, एक फरवरी किसान संगठनों ने शनिवार को केंद्रीय बजट की आलोचना करते हुए कहा कि इसमें सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य की कानूनी गारंटी और कृषि ऋण माफी जैसी उनकी लंबे समय से चली आ रही मांगों की पूरी तरह उपेक्षा की गई है।
संगठनों ने ‘‘किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, गरीब विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक बजट’’ के खिलाफ पांच फरवरी को विरोध प्रदर्शन की घोषणा की।
संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने यहां जारी एक बयान में कहा कि बजट 2025-26 में बीमा क्षेत्र के 100 प्रतिशत निजीकरण सहित अधिक विनियमन एवं उदारीकरण के प्रस्ताव ऐसे समय में खतरनाक हैं, जब अर्थव्यवस्था कृषि, विनिर्माण और सेवाओं सहित सभी क्षेत्रों पर ‘‘कॉरपोरेट आधिपत्य’’ के बढ़ने के संदर्भ में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।
एसकेएम ने कहा, ‘‘बजट में सभी फसलों के लिए कानूनी रूप से गारंटीकृत एमएसपी की लंबे समय से लंबित मांग की क्रूरतापूर्वक उपेक्षा की गई है। इसे कॉरपोरेट मुनाफे में अनियंत्रित वृद्धि के संदर्भ में गंभीरता से देखने की जरूरत है, जो 2022-23 में 10,88,000 करोड़ रुपये और 2023-24 में बढ़कर 14,11,000 करोड़ रुपये हो गई है।’’
संगठन ने यह भी कहा कि किसानों के लिए कोई ऋण माफी की घोषणा नहीं की गई, जबकि संसदीय समिति ने इसकी सिफारिश की थी।
एसकेएम और केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने यह भी कहा कि वे बजट के खिलाफ पांच फरवरी को विरोध प्रदर्शन करेंगे।
किसान संगठन ने कहा, ‘‘एसकेएम किसानों और सभी मेहनतकश लोगों से आह्वान करता है कि वे आगे आएं और पांच फरवरी 2025 को पूरे भारत में किसान विरोधी, मजदूर विरोधी, गरीब विरोधी और कॉरपोरेट समर्थक बजट 2025-26 के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करें और इसकी प्रतियां जलाएं तथा इसमें शामिल सभी जनविरोधी प्रस्तावों को वापस लेने की मांग करें।’’
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