देश की खबरें | किसान संसद के पांचवें दिन संविदा कृषि अधिनियम पर किसानों ने की चर्चा

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नयी दिल्ली, 28 जुलाई संसद के मॉनसून सत्र के समानांतर चल रहे किसान संसद के पांचवें दिन किसानों ने अनुबंध कृषि अधिनियम, 2020 पर विचार-विमर्श किया। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बुधवार को एक बयान जारी कर यह जानकारी दी।

यह कहते हुए कि सरकार ने पिछले साल "अलोकतांत्रिक और असंवैधानिक तरीके से" इन कानूनों को लाया, 40 से अधिक किसान संघों के मंच ने कहा, "यह कॉर्पोरेट खेती और संसाधन हथियाने को सुविधाजनक बनाने के लिए एक कानूनी ढांचा है।"

दिन भर में कुल तीन किसान संसद सत्र आयोजित किए गए, जिनका संचालन विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं द्वारा किया गया। चर्चा के प्रमुख विषयों में अनुबंध खेती के कारण खाद्य सुरक्षा को खतरा और पर्यावरणीय क्षरण शामिल थे।

एसकेएम ने कहा कि कई सदस्यों ने अनुबंध खेती के अपने व्यक्तिगत अनुभवों को साझा किया जैसे कि किसान द्वारा पूरे सीजन की मेहनत के बाद कोई अन्य कारण बताकर उनके उपज को कंपनियों द्वारा अस्वीकार करने का मामला।

एसकेएम ने कहा, “उन्होंने इस बारे में बात की कि कैसे केंद्रीय कानून कॉर्पोरेट खेती और संसाधन-हथियाने को सुविधाजनक बनाता है। पर्यावरणीय नुकसान के अलावा, अनुबंध खेती से खाद्य सुरक्षा के लिए संभावित खतरे पर प्रकाश डाला गया।”

बयान में कहा गया है कि संविदा कृषि अधिनियम पर बहस अगले दिन भी जारी रहेगी।

गौरतलब है कि किसान संसद पिछले साल नवंबर से दिल्ली की कई सीमाओं पर केंद्र के तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध कर रहे किसानों की नवीनतम रणनीति का हिस्सा है।

कृष्ण

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