देश की खबरें | व्यवस्था की विफलता से अट्टापडी में शिशु की मौत हुई : विपक्ष का आरोप, सरकार ने खंडन किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल विधानसभा में विपक्ष ने बृहस्पतिवार को एक स्थगन प्रस्ताव पेश कर आरोप लगाया कि पलक्कड़ जिले के अट्टापडी क्षेत्र के आदिवासी बस्ती में एक शिशु की मौत व्यवस्था की विफलता के कारण हुई। हालांकि, प्रदेश में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (एलडीएफ) ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्षी यूडीएफ के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया ।
तिरूवनंतपुरम, 14 जुलाई केरल विधानसभा में विपक्ष ने बृहस्पतिवार को एक स्थगन प्रस्ताव पेश कर आरोप लगाया कि पलक्कड़ जिले के अट्टापडी क्षेत्र के आदिवासी बस्ती में एक शिशु की मौत व्यवस्था की विफलता के कारण हुई। हालांकि, प्रदेश में सत्तारूढ़ वाम मोर्चा (एलडीएफ) ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद विपक्षी यूडीएफ के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया ।
अट्टापडी में हाल ही में एक नवजात बालिका की मौत के बाद स्थगन प्रस्ताव पेश किया गया ।
प्रदेश के अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के. राधाकृष्णन ने कहा कि सदन की नियमित कार्यवाही को रोक कर इस मुद्दे पर चर्चा करने की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि राज्य सरकार वहां किसी भी तरह की स्वास्थ्य समस्या के हल के लिये आवश्यक कदम उठा रही है। आईयूएमएल के विधायक एन. समशुद्दीन ने विधानसभा में इस मुद्दे को उठाया था।
मंत्री ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद वहां नवजात बच्ची की मौत के कारणों का पता लग सकता है। उन्होंने कहा कि वहां आदिवासी बस्ती की समस्या के समाधान के लिये स्थानीय विधायक और सांसद समेत सभी लोगों को मिल कर काम करना चाहिए।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद विधानसभा अध्यक्ष एम. बी. राजेश ने कहा कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री के बयान के मद्देनजर स्थगन प्रस्ताव को खारिज किया जाता है।
शमसुद्दीन ने प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान आरोप लगाया कि वहां बुनियादी स्वास्थ्य सुविधायें मौजूद नहीं हैं और इलाके में एक मात्र अस्पताल है जहां कर्मचारी, चिकित्सक, विशेषज्ञ, स्कैनिंग उपकरण और टीके तक उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि अस्पताल में पानी की उचित आपूर्ति नहीं होती है और बिल का भुगतान नहीं करने के कारण अस्पताल का बिजली कनेक्शन काट दिया गया है ।
इन आरोपों को प्रदेश के स्वास्थ्य एवं बिजली मंत्री के. कृष्णनकुट्टी तथा राधाकृष्णन ने खारिज कर दिया। कृष्णनकुट्टी ने शुरूआत में कहा कि उन्हें एक फोन कॉल करने मात्र से बिजली आपूर्ति बहाल हो जाती। इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि बिजली आपूर्ति कभी काटी ही नहीं गयी।
विधानसभा में विपक्ष के नेता वी. डी. सतीशन ने कहा कि आदिवासी बस्तियों में गर्भवती माताओं, बच्चों और अन्य लोगों की देखभाल के लिए यूडीएफ शासन के दौरान सामुदायिक रसोई सहित तमाम व्यवस्थाएं की गई थीं जो अब बंद हो चुकी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल में नवजात शिशुओं और माताओं की देखभाल नहीं की जा रही है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में कोई तकनीशियन नहीं है। उन्होंने दावा किया कि 59 कर्मचारियों की छंटनी की गई और वहां पर्याप्त डॉक्टर या विशेषज्ञ नहीं हैं।
स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने वहां बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे की कमी के संबंध में विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल में बाल चिकित्सा आईसीयू स्थापित किया जा रहा है और वहां पहले से ही नवजात देखभाल सुविधा मौजूद है।
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