नयी दिल्ली, छह जून शिक्षा मंत्रालय का कहना है कि पीएचडी उपाधि प्राप्त संकाय सदस्यों की मौजूदगी शीर्ष 100 संस्थानों तक ही सीमित है जबकि शेष संस्थानों में डॉक्टरेट की डिग्री वाले संकाय सदस्यों की संख्या कम है।
राष्ट्रीय संस्थागत रैंकिंग फ्रेमवर्क (एनआईआरएफ) के आठवें संस्करण के लिए मंत्रालय के विश्लेषण के अनुसार, पीएचडी डिग्रीधारक संकाय सदस्यों की कमी का मुद्दा एक गंभीर "बाधा" है क्योंकि डॉक्टरेट प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त सलाह उच्च शिक्षा में शिक्षण कैरियर के लिए संकाय तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
विश्लेषण के अनुसार, शीर्ष 100 संस्थानों में पीएचडी वाले संकाय सदस्य कॉलेजों के मामले में न्यूनतम 61.06 प्रतिशत से लेकर प्रबंधन संस्थानों के मामले में अधिकतम 91.60 प्रतिशत तक हैं।
वहीं, पीएचडी वाले संकाय सदस्य फार्मेसी संस्थानों के मामले में न्यूनतम 33.27 प्रतिशत से लेकर विश्वविद्यालयों के मामले में अधिकतम 64.29 प्रतिशत तक हैं।
मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, "इंजीनियरिंग शिक्षा में भारत में पिछले दो दशकों में अभूतपूर्व वृद्धि दिखी है, जिसमें हजारों इंजीनियरिंग संस्थान, निजी क्षेत्र के साथ-साथ सरकारी क्षेत्र में, देश के लगभग सभी हिस्सों में दिखाई देते हैं। भारत में उच्च शिक्षा संस्थानों की एक बड़ी तस्वीर प्राप्त करने के वास्ते संकाय डेटा के विश्लेषण के लिए इंजीनियरिंग का चयन किया जाता है।"
इसमें कहा गया है, "यह विषय अपने स्नातकों की गुणवत्ता और रोजगार क्षमता के मामले में भी एक बड़ी चुनौती से गुजर रहा है।"
हालांकि, इंजीनियरिंग संकाय के केवल 44.51 प्रतिशत सदस्यों के पास डॉक्टरेट की योग्यता है, जबकि 55 प्रतिशत से अधिक संकाय सदस्यों के पास मास्टर डिग्री है।
केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री राजकुमार रंजन सिंह ने सोमवार को एनआईआरएफ का आठवां संस्करण जारी किया।
नेत्रपाल नरेश
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