देश की खबरें | त्रिपुरा में ‘चेहरा परिवर्तन’ सरकार के कामकाज में सुधार लाने में रहा विफल: माणिक सरकार
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता माणिक सरकार ने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा नीत शासन में ‘चेहरा परिवर्तन’ सरकार के कामकाज में सुधार लाने में विफल रहा है।
अगरतला, चार सितंबर विपक्षी दल मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता माणिक सरकार ने कहा कि त्रिपुरा में भाजपा नीत शासन में ‘चेहरा परिवर्तन’ सरकार के कामकाज में सुधार लाने में विफल रहा है।
इस साल मई में इस पूर्वोत्तर राज्य में नेतृत्व परिवर्तन किया गया था और बिप्लव कुमार देब के स्थान पर माणिक साहा को मुख्यमंत्री बनाया गया था।
माकपा नेता ने शनिवार को सेपाहिजाला जिले के बगमा में एक रैली को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘सही ढंग से काम नहीं करने वाले एवं अपने बयानों से विवादों को जन्म देने वाले मुख्यमंत्री को हमने हटाने की मांग नहीं की थी। भाजपा नेतृत्व को ही एहसास हुआ कि पार्टी में लोगों का विश्वास घट रहा है जिसके बाद उसने मुख्यमंत्री बदला था।’’
माकपा पोलित ब्यूरो के सदस्य सरकार ने दावा किया कि नए मुख्यमंत्री के भाजपा-आईपीएफटी गठबंधन सरकार की कमान संभालने के बाद भी त्रिपुरा की संपूर्ण राजनीतिक स्थिति ‘‘बहुत बिगड़’’ गई है।
उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के संपूर्ण कामकाज में कोई बदलाव नहीं आया है। मुख्यमंत्री बदलकर भाजपा ने अपनी अगुवाई वाली सरकार की विफलता पर ही मुहर लगाई है।’’
सरकार ने याद दिलाया कि कैसे वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता दशरथ देब को उनके बिगड़ते स्वास्थ्य के बाद भी 1993 से 1998 तक मुख्यमंत्री रहने दिया गया था।
उन्होंने कहा कि देब के राजनीतिक कौशल एवं उनके प्रति लोगों के प्यार एवं स्नेह को देखते हुए उन्हें 1998 में उनकी मृत्यु तक पद पर रहने दिया गया।
राज्य में ‘‘फासीवादी शासन’’ होने का आरोप लगाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि त्रिपुरा में मतदाताओं को मताधिकार का इस्तेमाल नहीं करने दिया जा रहा।
माकपा नेता ने कहा, ‘‘वर्तमान सरकार को हटाने की हर घर में तैयारी होनी चाहिए, अन्यथा जीवन मुश्किल हो जाएगा।’’
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने विपक्षी नेता के आरोप का खंडन किया और कहा कि संवैधानिक अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं। पार्टी प्रवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती ने कहा, ‘‘जिन्हें तानाशाही में यकीन है, वे लोकतंत्र एवं संविधान पर सवालिया निशान लगा रहे हैं। वे विधानसभा चुनाव से पहले सफेद झूठ बोल रहे हैं।’’
त्रिपुरा में अगले साल की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होना है।
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