देश की खबरें | मौजूदा भू-राजनीतिक परिदृश्य से भविष्य के खतरों की प्रकृति के बारे में अनिश्चितता बढ़ रही: सीडीएस
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नयी दिल्ली, 22 मई प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने अपनी नयी पुस्तक में कहा है कि 21वीं सदी के उथल पुथल वाले भू-राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर भविष्य के खतरों की प्रकृति, प्रकार और समय के बारे में अनिश्चितता बढ़ रही है।
पुस्तक ‘‘रेडी, रिलेवेंट एंड रीसर्जेंट: ए ब्लूप्रिंट फॉर ट्रांसफॉर्मेशन आफ इंडियाज मिलिट्री’ का विमोचन बृहस्पतिवार को यहां रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने किया।
यह पुस्तक 21वीं सदी की युद्ध रणनीतियों की मांगों को पूरा करने और राष्ट्रहितों की प्रभावी रूप से रक्षा करने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों में जारी परिवर्तन की गहरी झलक प्रस्तुत करती है, जो संयुक्तता, एकीकरण और आत्मनिर्भरता से प्रेरित है।
मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, ‘‘यह भारत के शीर्ष रक्षा प्रतिष्ठान में एक नये युग की शुरुआत को दर्शाती है। प्रभावशाली लेखों की एक श्रृंखला के माध्यम से यह पुस्तक 2047 तक सशक्त, सुरक्षित, समृद्ध और विकसित भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य के प्रति समर्पित भविष्य के लिए तैयार सेना के निर्माण की स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत करती है।’’
सीडीएस ने पुस्तक में लिखा है, ‘‘भारत 2047 तक एक विकसित राष्ट्र - विकसित भारत -बनने की आकांक्षा रखता है। आर्थिक रूप से जीवंत और राजनीतिक रूप से स्थिर भारत की नींव एक मजबूत सैन्य शक्ति पर टिकी होनी चाहिए। राष्ट्रीय शक्ति के चार आधार कूटनीतिक, अंतरराष्ट्रीय, सैन्य और आर्थिक हैं। इन सभी को एक समान दृष्टिकोण की दिशा में एकजुट होकर काम करना होगा, जिससे भारत अपना वांछित लक्ष्य प्राप्त कर सके।’’
सीडीएस ने पुस्तक में लिखा है कि सशस्त्र बल हमेशा से राष्ट्र की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता के लिए चुनौतियों का सामना करने वाले ‘‘प्रथम उत्तरदाता’’ रहे हैं और उन्होंने अपने कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से आत्मविश्वास के साथ निभाया है।’’
उन्होंने लिखा है, ‘‘हालांकि, हमारे सामने 21वीं सदी के उथल-पुथल भरे भू-राजनीतिक परिदृश्य के मद्देनजर, भविष्य के खतरों की प्रकृति, प्रकार और समय के बारे में अनिश्चितता बढ़ रही है। इस संदर्भ में हमें सुरक्षा की अवधारणा पर विचार करना होगा जो विभिन्न क्षेत्रों और क्षेत्राधिकार में विस्तारित हो गई है।’’
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