विदेश की खबरें | प्रकृति का संरक्षण करने वाले एक अहम विधेयक पर यूरोपीय संघ की मतदान कराने की तैयारी
श्रीलंका के प्रधानमंत्री दिनेश गुणवर्धने

जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग से प्रेरित सैकड़ों प्रदर्शनकारी यह मांग कर रहे हैं कि यूरोपीय संघ दशकों के औद्योगिक विस्तार के दौरान क्षतिग्रस्त हुई प्रकृति को बहाल करने के लिए एक विधेयक को आगे बढ़ाये।

यूरोपीय संघ में 27 देश शामिल हैं।

फ्रांस के स्ट्रासबर्ग में संसद में इसके सदस्यों ने बुधवार को मतदान कराने के लिए अंतिम क्षणों में प्रयास किया। संसद की पर्यावरण समिति पिछले महीने इस पर बराबर संख्या (44-44) में बंटी हुई थी।

यह विधेयक ईयू के यूरोपीय हरित समझौते का एक अहम हिस्सा है, जो विश्व का सर्वाधिक महत्वाकांक्षी जलवायु एवं जैवविधिता लक्ष्य निर्धारित करता है।

ईयू के कार्यकारी आयोग द्वारा प्रस्तावित प्रस्ताव विशेष अधिवास एवं प्रजातियों के लिए बाध्यकारी लक्ष्य निर्धारित करते हैं।

यूरोपीय संघ के पर्यावरण आयुक्त वरर्जीनीजस सिंकेविसियस ने कहा कि यूरोपीय आयोग ‘‘कुछ खास प्रावधानों पर पुनर्विचार करेगा और उन्हें बेहतर बनाएगा तथा स्पष्टता बढ़ाकर यह सुनिश्चित करेगा कि प्रस्ताव मौजूदा हकीकत को प्रदर्शित करे।’’

यदि संसद इस योजना को बुधवार को खारिज कर देती है तो इसे वापस मसौदा बोर्ड के पास भेज दिया जाएगा।

पर्यावरण प्रदर्शनकारियों के अलावा सैकड़ों अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिकों और यहां तक कि कई देशों के नागरिकों के समूह ने ईयू के जलवायु बहाली कानून को मंजूरी देने की अपील की है।

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