पूरोप को पैरासिटामॉल के भारत से 1,000 टन कच्चा माल की जरूरत : फार्मेक्सिल
भारतीय फार्मास्युटिकल निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) के अध्यक्ष दिनेश दुआ ने कहा कि राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्यनिर्धारक प्राधिकार ने इन रसायनों (एपीआई) को यूरोप को निर्यात करने की अपनी मंजूरी दे दी है। ?
नयी दिल्ली, छह मई यूरोप ने भारत से पैरासिटामोल बनाने में काम आने वाले लगभग 1,000 टन सक्रिय औषधीय रसायनों (एपीआई) की मांग की है। यह दवा शरीर के दर्द और बुखार के इलाज की एक सामान्य दवा है। फार्मेक्सिल ने यह जानकारी दी है।
भारतीय फार्मास्युटिकल निर्यात संवर्धन परिषद (फार्मेक्सिल) के अध्यक्ष दिनेश दुआ ने कहा कि राष्ट्रीय फार्मास्युटिकल मूल्यनिर्धारक प्राधिकार ने इन रसायनों (एपीआई) को यूरोप को निर्यात करने की अपनी मंजूरी दे दी है। ?
दुआ ने कहा अब इस बारे में ‘‘विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) और विदेश मंत्रालय को फैसला लेना है।‘‘
कोविड-19 प्रकोप के फैलने के बीच 17 अप्रैल को, सरकार ने पैरासिटामॉल से बनी दवाओं के निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिया। हालांकि, पैरासिटामोल में इस्तेमाल होने वाले सक्रिय औषधीय पदार्थों (एपीआई) के निर्यात पर प्रतिबंध हैं।
प्रतिबंधित श्रेणी के अंतर्गत आने वाले किसी उत्पाद को निर्यात करने के लिए, एक निर्यातक को डीजीएफटी से अनापत्ति प्रमाण पत्र या लाइसेंस की अनुमति लेने की आवश्यकता होती है।
दुआ ने कहा कि औसतन, यूरोप को प्रति माह लगभग 1,000 टन इन एपीआई की आवश्यकता होती है और कोरोना संकट से पहले एक समय ऐसा था जब भारत महीने में लगभग 1,400 टन तक का निर्यात किया था।
उन्होंने कहा कि देश में इस सामग्री की पर्याप्त उपलब्धता है और , ‘‘हम प्रति माह केवल 2,000 टन की खपत करते हैं और हमारी उत्पादन क्षमता लगभग 6,200 टन प्रति माह की है।’’
भारत ने अप्रैल-जनवरी 2019-20 के दौरान 5.41 अरब डालर के पेरासिटामोल से बने फॉर्मूलेशन का निर्यात किया। यह मात्रा वर्ष 2018-19 में 5.8 अरब डॉलर थी।
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(The above story first appeared on LatestLY on May 06, 2020 11:05 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

