यूरोप बन रहा एलजीबीटीक्यू समुदाय का सुरक्षित ठिकाना

अलग-अलग देशों में सख्त कानूनों के कारण यूरोप में समलैंगिकों के शरण के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit: Image File)

अलग-अलग देशों में सख्त कानूनों के कारण यूरोप में समलैंगिकों के शरण के आवेदन लगातार बढ़ रहे हैं.जबरदस्ती की गई शादी और कड़वे घरेलू जीवन से बचने के लिए एला एंटनी को अपना देश नाइजीरिया छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. उनके रिश्तेदारों ने उन्हें धमकी दी कि अगर उन्होंने शादी से इनकार किया तो उन्हें पुलिस को सौंप दिया जाएगा क्योंकि वह एक समलैंगिक है. नाइजीरिया में समलैंगिकता गैरकानूनी है.

चूंकि नाइजीरिया ने समलैंगिक संबंधों को अपराध घोषित कर दिया है, एंटनी अपने पार्टनर के साथ 2014 में लीबिया चली गईं और फिर इटली, जहां उन दोनों को शरण मिली.

यूरोप बनता ठिकाना

अफ्रीका और मध्य पूर्व से हजारों लोग युद्ध और अन्य संघर्षों से भागकर इटली आ रहे हैं, लेकिन मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के मुताबिक कई देशों में उन्हें उनकी पसंद के कारण हिंसा का सामना करना पड़ रहा है.

अपने देश में हिंसा और भेदभाव का सामना करने वाले समलैंगिक समुदाय के सदस्य यूरोप आ रहे हैं ताकि वह यहां सुरक्षित ठिकाना पा सकें.

हालांकि समलैंगिकता पर आधारित सफल शरण आवेदनों में कई बाधाएं हैं लेकिन एंटनी और उनकी साथी डोरिस एजुरुइके चिनोसो ने साबित कर दिया है कि वे सभी बाधाओं के बावजूद दृढ़ रह सकती हैं और यूरोप में शरण ले सकती हैं.

34 साल की चिनोसो कहती हैं, "निश्चित रूप से जीवन यहां 100 प्रतिशत वैसा नहीं है जैसा हम चाहते थे, लेकिन यह मान लीजिए कि हमारे देश की तुलना में 80 प्रतिशत बेहतर है."

चिनोसो अब इटली की राजधानी रोम के उत्तर में एक रेतीले इलाके में एंटनी के साथ रहती हैं. वह कहती हैं, "नाइजीरिया में अगर आप भाग्यशाली हैं तो आप जेल में होंगे और यदि आप दुर्भाग्यशाली हैं, तो आपको मार दिया जाएगा."

उनका कहना है कि यूरोप में आप अपनी मर्जी से जीवन जी सकते हैं.

यूरोप के ज्यादातर देश समलैंगिकता पर आधारित शरण आवेदनों पर आंकड़े जारी नहीं करते हैं, लेकिन कई गैर-सरकारी संगठनों के मुताबिक जिन देशों में समलैंगिकता पर कानून कड़े किए जा रहे हैं, वहां से भागकर यूरोप में शरण चाहने वालों की संख्या बढ़ रही है.

मौजूदा समय में दुनिया के अधिकांश देशों, जिनमें ज्यादातर अफ्रीका, मध्य पूर्व और एशिया के देश हैं, में समलैंगिकता के खिलाफ सख्त कानून हैं.

एलजीबीटीक्यू+ लोगों को वित्तीय, कानूनी और अन्य सहायता देने वाले संगठन रेनबो रेलरोड के किमाहली पावेल कहते हैं, "अंतिम नतीजा यह होता है कि लोग इन देशों से भागकर कहीं और सुरक्षित ठिकाना ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं."

पावेल ने कहा कि उनके संगठन को पिछले साल मदद के लिए लगभग 15,000 अनुरोध मिले थे. जो उससे पहले के साल में 9,500 थे. उन्होंने बताया कि इनमें से अधिकतर आवेदन युगांडा के लोगों के थे, जिनकी संख्या करीब 1,500 थी.

देश बना रहे सख्त कानून

युगांडा ने हाल ही में समलैंगिकता पर सबसे सख्त कानून बनाया है. युगांडा में समलैंगिकता अब एक दंडनीय अपराध है और इसमें शामिल व्यक्ति को 14 साल तक की जेल की सजा हो सकती है.

इसी तरह से नाइजीरिया ने 2014 में एक बिल पास किया, जिसमें समलैंगिक सेक्स के लिए 14 साल की सजा का प्रावधान किया गया.

37 साल की एंटनी का कहना है कि उन्हें वास्तव में अपने देश में जेल का खतरा था जिस कारण उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कहा कि उनके परिवार ने उन्हें शादी के लिए बेच दिया था, लेकिन वह शादी से बाहर आ गईं क्योंकि उनका पति बार-बार उनके साथ दुर्व्यवहार करता था. जब वह अपने घर लौटीं, तो उनके भाई और चाचाओं ने उसे समलैंगिक होने के कारण पुलिस के हवाले करने की धमकी दी.

डर और अलगाव ने उन्हें पहले आत्महत्या का प्रयास करने के लिए मजबूर किया और फिर उन्होंने यूरोप जाने के लिए भुगतान करने के लिए एक तस्कर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया.

लीबिया पहुंचने के बाद एंटनी और चिनोसो ने भूमध्य सागर से इटली तक की जोखिम भरी नाव यात्रा के लिए तस्करों को भुगतान किया, जहां उन दोनों ने एलजीबीटीक्यू+ लोगों के एक समूह के सदस्य के रूप में शरण की अपील की.

शरणार्थी नियमों के मुताबिक शरण के लिए आवेदकों को "एक विशेष सामाजिक समूह का सदस्य" होने के आधार पर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रदान की जा सकती है.

एए/वीके (एपी)

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