ताजा खबरें | देश में 10,500 से अधिक जन औषधि केंद्रों में आवश्यक दवाएं किफायती दामों में उपलब्ध : मंडाविया
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश में 12 करोड़ परिवारों अर्थात लगभग 60 करोड़ लोगों को ‘स्वास्थ्य सुरक्षा’ दी गई है और 10,500 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गरीबों को आवश्यक दवाएं किफायती दामों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
नयी दिल्ली, छह फरवरी सरकार ने मंगलवार को कहा कि देश में 12 करोड़ परिवारों अर्थात लगभग 60 करोड़ लोगों को ‘स्वास्थ्य सुरक्षा’ दी गई है और 10,500 से अधिक जन औषधि केंद्रों के माध्यम से गरीबों को आवश्यक दवाएं किफायती दामों में उपलब्ध कराई जा रही हैं।
रसायन एवं उर्वरक मंत्री डॉ मनसुख मंडाविया ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान यह भी बताया कि दवाओं की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक सतर्कता प्रणाली है जो एक सतत प्रक्रिया है।
जन औषधि केंद्रों में उपलब्ध दवाओं के बारे में पूछे गए पूरक प्रश्न के जवाब में मंडाविया ने कहा कि वर्तमान सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र को व्यापक रूप में देखती है तथा यह सुनिश्चित करना चाहती है कि दवाएं किफायती हों एवं अच्छे इलाज तक सबकी पहुंच हो।
उन्होंने बताया कि आज देश में एक लाख 64 हजार से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर हैं और इनके लिए डॉक्टर भी जरूरी हैं जिसे देखते हुए देश में एमबीबीएस की सीटें दोगुनी की गईं एवं मेडिकल कालेजों की संख्या भी बढ़ाई गई।
उन्होंने बताया कि देश में पहले 350 मेडिकल कॉलेज थे जो आज बढ़ कर 760 हो गए हैं। उन्होंने कहा कि ‘‘यह सब डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए किया गया।’’
मंडाविया ने बताया कि देश में 12 करोड़ परिवार यानी 60 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य सुरक्षा दी गई है और वे लोग अब पांच लाख रुपये तक का इलाज मुफ्त करा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि गरीबों को किफायती दरों में दवाएं उपलब्ध कराने के लिए आज 10,500 से अधिक जन औषधि केंद्र चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि दवाओं की उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए एक सतर्कता प्रणाली है जो एक सतत प्रक्रिया है।
भाजपा के लक्ष्मीकांत बाजपेयी ने पूछा था कि क्या आम जनमानस की पहुंच से दूर महंगी दवाएं जन औषधि केंद्रों में बेचे जाने पर विचार किया जाएगा।
इसके जवाब में रसायन और उर्वरक राज्य मंत्री भगवंत खुबा ने बताया कि बाजार में सर्वे करने के बाद एवं अनुकूल समझे जाने के बाद ऐसी दवाएं जन औषधि केंद्रों में बेचे जाने पर सरकार विचार करेगी।
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