देश की खबरें | सामान्यीकरण के लिए ‘इक्वी पर्सेंटाइल’ पद्धति का दशकों से उपयोग किया जा रहा:सीयूईटी पर यूजीसी प्रमुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने सोमवार को कहा कि ‘सीयूईटी-यूजी’ के स्कोर के सामान्यीकरण के लिए प्रयुक्त की जाने वाली ‘इक्वी पर्सेंटाइल’ पद्धति दशकों से विश्व में उपयोग में लाई जा रही है और यह एक निष्पक्ष प्रणाली है, जिसमें किस्मत की कोई भूमिका नहीं होती है।
नयी दिल्ली, 17 जुलाई विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के अध्यक्ष एम जगदीश कुमार ने सोमवार को कहा कि ‘सीयूईटी-यूजी’ के स्कोर के सामान्यीकरण के लिए प्रयुक्त की जाने वाली ‘इक्वी पर्सेंटाइल’ पद्धति दशकों से विश्व में उपयोग में लाई जा रही है और यह एक निष्पक्ष प्रणाली है, जिसमें किस्मत की कोई भूमिका नहीं होती है।
देश के 200 से अधिक विश्वविद्यालयों में स्नातक में दाखिले के लिए साझा विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा-स्नातक (सीयूईटी-स्नातक) के परिणाम शनिवार को घोषित किये गये थे। कुछ उम्मीदवारों ने सामान्यीकरण के कारण अपना स्कोर नीचे गिर जाने की शिकायत की है।
जगदीश कुमार ने कहा, ‘‘पहले हमें इस बात पर ध्यान देना होगा कि हमें परीक्षा में बड़ी संख्या में छात्रों के शामिल होने और विषयों को ध्यान में रखते हुए कई पालियों में इसका आयोजन करना पड़ा।’’
उन्होंने कहा कि उदाहरण के लिए अगर परीक्षा अर्थशास्त्र की है तब राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के विशेषज्ञ विभिन्न पालियों में उपयोग में लाने के लिए अर्थशास्त्र के कई प्रश्न पत्र तैयार करते थे।
यूजीसी अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमारे तमाम प्रयासों के बावजूद प्रत्येक पत्र में कठिनाई का स्तर एक दूसरे से थोड़ा भिन्न था। ऐसे में किसी छात्र द्वारा हासिल स्कोर की बजाए स्कोर का सामान्यीकरण करने की जरूरत है।’’
उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से विभिन्न पालियों में कठिनाई के स्तर के आधार पर सामान्यीकरण के लिए ‘इक्वी पर्सेंटाइल’ पद्धति का उपयोग किया गया।
कुमार ने कहा कि इस पद्धति का उपयोग दशकों से वैश्विक स्तर पर हो रहा है। यह निष्पक्ष प्रणाली है, जहां किस्मत की कोई भूमिका नहीं होती है।
आवेदकों की संख्या के लिहाज से सीयूईटी-यूजी देश की दूसरी सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षा है। इसके पहले संस्करण में 12.5 लाख छात्रों ने परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था और 9.9 लाख ने अपने आवेदन किए थे।
इस साल परीक्षा 21 मई से पांच जुलाई के बीच नौ चरणों में आयोजित की गई और पिछले साल के विपरीत, यह तीन पालियों में आयोजित की गई।
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