देश की खबरें | पर्यावरण संरक्षण 21वीं सदी के लिए चिंता का प्रमुख मुद्दा बन गया है: राष्ट्रपति मुर्मू

नयी दिल्ली, 24 जुलाई राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सोमवार को कहा कि पर्यावरण में गिरावट, वन क्षेत्र में कमी, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरे वैश्विक चर्चा एवं भागीदारी के केन्द्र में हैं तथा पर्यावरण संरक्षण 21वीं सदी के लिए एक चिंता का प्रमुख मुद्दा बन गया है।

राष्ट्रपति मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में भारतीय वन सेवा के प्रोबेशनर (2022 बैच) और भारतीय रक्षा संपदा सेवा (2018 और 2022 बैच) के अधिकारियों/ प्रशिक्षु अधिकारियों से मुलाकात के दौरान यह बात कही।

उन्होंने कहा कि भारत की जलवायु और भौगोलिक स्थिति वनों के फैलाव से निकटता से जुड़ी हुई है और वन तथा वन्यजीव देश के अमूल्य संसाधन और विरासत हैं जिन्हें वन सहारा देते हैं।

मुर्मू ने कहा, ‘‘ पर्यावरण में गिरावट, वन क्षेत्र में कमी, ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरे वैश्विक बातचीत और भागीदारी के केन्द्र में हैं। इसीलिए पर्यावरण संरक्षण 21वीं सदी के लिए चिंता का एक प्रमुख मुद्दा बन गया है।’’

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत ने दुनिया को "लाइफ-लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट" का मंत्र दिया है।

उन्होंने कहा कि भारतीय वन सेवा के अधिकारी समाधान प्रदाताओं में से हैं और ऐसे में उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे इस मंत्र के व्यावहारिक क्रियान्वयन के लिए अथक प्रयास करें।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि प्रशासनिक सेवा के रूप में उनकी यात्रा ऐसे समय में शुरू हुई है जब भारत ने वैश्विक स्तर पर नेतृत्व हासिल किया है।

उन्होंने कहा कि भारत ने अपनी सांस्कृतिक समृद्धि के साथ-साथ अपनी तकनीकी प्रगति के लिए विश्व का ध्यान आकर्षित किया है और दुनिया को दिखाया है कि प्रोद्यौगिकी और परंपराएं साथ-साथ चल सकती हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि यह भारतीय रक्षा संपदा सेवा के अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे यह सुनिश्चित करें कि उनके द्वारा प्रदान की जाने वाली सेवाएं और सुविधाएं पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ हों।

उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी सुशासन को सक्षम बनाती है और उन्हें विशेषज्ञता के साथ-साथ अपने तकनीकी कौशल में सुधार करते रहना चाहिए।

उन्होंने कहा कि छावनियों में प्रभावी प्रशासन और रक्षा भूमि के प्रबंधन के लिए प्रौद्योगिकी का अधिकतम संभव उपयोग किया जाना चाहिए।

दीपक

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