नयी दिल्ली, 18 मई वित्त मंत्रालय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कारोबारी यात्रा के दौरान कर्मचारी की तरफ से किए गए खर्च का बोझ अगर नियोक्ता उठाता है तो वह रिजर्व बैंक की उदारीकृत धनप्रेषण योजना (एलआरएस) के दायरे में नहीं आएगा।
मंत्रालय ने रिजर्व बैंक की एलआरएस के बारे में जारी सवाल-जवाब की एक सूची में यह स्पष्टीकरण दिया है।
मंत्रालय ने कहा, ‘‘जब कोई कर्मचारी कंपनी की तरफ से कारोबारी यात्रा पर भेजा जाता है और बाद में उस खर्च का बोझ नियोक्ता उठाता है, तो वह व्यय एलआरएस के बाहर अवशिष्ट चालू खाता लेनदेन माना जाएगा। उसे किसी सीमा के बगैर अधिकृत डीलर अनुमति दे सकता है, बशर्ते कि उस लेनदेन की असलियत का सत्यापन हो जाए।’’
एलआरएस के तहत किसी व्यक्ति को विदेश में अधिकतम 2.5 लाख डॉलर सालाना धनप्रेषण की ही मंजूरी है। इस राशि से अधिक खर्च होने पर रिजर्व बैंक की अनुमति जरूरी होगी।
वित्त मंत्रालय ने एलआरएस में अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड से किए जाने वाले भुगतान को शामिल करने के लिए गत 16 मई को विदेशी मुद्रा प्रबंधन (चालू खाता लेनदेन) संशोधन नियम, 2023 को अधिसूचित किया है।
प्रेम
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