देश की खबरें | उप्र में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण पर जोर, करीब 46 करोड़ रुपये की राशि जारी

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उत्तर प्रदेश में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए केन्द्र सरकार ने 121 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है, जिसमें से अब तक 46 करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि जारी कर दी गयी है। मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

लखनऊ, छह मई उत्तर प्रदेश में भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए केन्द्र सरकार ने 121 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की है, जिसमें से अब तक 46 करोड़ रुपये से ज्यादा धनराशि जारी कर दी गयी है। मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में यह जानकारी दी गयी।

बयान के अनुसार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने निर्देश दिया है कि जनता की सुविधा के लिए पूरे प्रदेश के भू-अभिलेखों का डिजिटलीकरण किया जाए। बयान के अनुसार इस योजना के अंतर्गत जमीन से जुड़े सभी अभिलेख जैसे भू-नक्शा, खतौनी और खसरा को डिजिटल माध्यम से आमजन तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाएगी, जिसके लिए विस्तृत डेटा बैंक बनाया जाएगा। बयान के अनुसार इससे भूमि से संबंधित दस्तावेज एक क्लिक में उपलब्ध हो सकेंगे।

बयान में कहा गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 'डिजिटल इंडिया' दृष्टि को साकार करने के लिए उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार ने अधिकारियों को निर्देशित किया है।

बयान में कहा गया है कि प्रदेशभर के भू-अभिलेखों के डिजिटलीकरण के लिए 121 करोड़ रुपये की बड़ी राशि स्वीकृत की गयी है। इसमें कहा गया है कि यह बजट भारत सरकार के डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत स्वीकृत किया गया है। बयान के अनुसार इस योजना के लागू होने से न केवल लोगों को दस्तावेजों के लिए सरकारी कार्यालयों के चक्कर काटने से मुक्ति मिलेगी, बल्कि पारदर्शिता भी सुनिश्चित होगी।

बयान के अनुसार डिजिटल इंडिया भू-अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत भारत सरकार द्वारा स्वीकृत कुल 121 करोड़ रुपये की राशि में से अब तक करीब 46 करोड़ 45 लाख रुपये जारी कर दिए गए हैं। बयान के अनुसार शेष करीब 74 करोड़ 64 लाख रुपये जल्द ही अवमुक्त किए जाएंगे।

बयान के अनुसार इस परियोजना के अंतर्गत पूरे प्रदेश में आधुनिक अभिलेख कक्ष (मॉडर्न रिकॉर्ड रूम) की स्थापना की जाएगी। इसके साथ ही डीआईएलआरएमपी सेल भी गठित किया जाएगा, जो इस कार्य को क्रियान्वित करेगा। बयान के अनुसार इसके अलावा विशेष कंप्यूटर प्रयोगशाला व डेटा बैंक भी बनाया जाएगा। बयान के अनुसार इसके जरिए भू-अभिलेखों तक आम जनता की पहुंच को आसान बनाने का मार्ग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

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