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कोविड-19 संकट के बीच प्रख्यात भारतीय अमेरिकियों ने साझा किए खुद को मिले बेहतरीन परामर्श

टाइम पत्रिका ने अपना सालाना अंक दुनिया की सर्वाधिक प्रभावशाली 100 हस्तियों पर केंद्रित करने के बजाय ‘‘टाइम 100 समुदाय’’ के सदस्यों से उन चुनौतियों पर उनके विचार जानने की कोशिश की जिन चुनौतियों का सामना आज पूरी दुनिया कोविड-19 के कहर की वजह से कर रही है।

कोविड-19 संकट के बीच प्रख्यात भारतीय अमेरिकियों ने साझा किए खुद को मिले बेहतरीन परामर्श

न्यूयॉर्क, 16 अप्रैल कोविड-19 संकट के इस दौर को हंस कर निकालने और बेहतर भविष्य को लेकर आशान्वित, पेप्सिको की पूर्व सीईओ इंद्रा नूयी सहित जाने माने भारतीय अमेरिकियों ने आशावादी बने रहने और प्रेरित करने के लिए स्वयं को मिले सर्वश्रेष्ठ परामर्शों को टाइम पत्रिका के विशेष संस्करण में साझा किया है।

टाइम पत्रिका ने अपना सालाना अंक दुनिया की सर्वाधिक प्रभावशाली 100 हस्तियों पर केंद्रित करने के बजाय ‘‘टाइम 100 समुदाय’’ के सदस्यों से उन चुनौतियों पर उनके विचार जानने की कोशिश की जिन चुनौतियों का सामना आज पूरी दुनिया कोविड-19 के कहर की वजह से कर रही है।

2008 में टाइम पत्रिका की 100 सर्वाधिक रसूखदार हस्तियों में शामिल रहीं इंद्रा नूयी ने अपने परामर्श में कहा ‘‘हां, अतीत की कुछ यादों को खंगालें। वर्तमान को लेकर बहुत ही ज्यादा यथार्थवादी रहें। खुद को नवीनतम जानकारियों से अपडेट रखें। भविष्य के प्रति आशावादी रहें। मानव की मेधा असीमित है।’’

2019 में टाइम की इसी सूची में शामिल रहे कॉमेडियन हसन मिन्हाज ने कहा ‘‘खबरें पढ़ने के तत्काल बाद कोई शारीरिक व्यायाम की कोशिश करें। पुश-अप करें, पैदल चलें, 25 बार कूदें। आप दुख और चिंता का अनुभव करने जा रहे हैं इसलिए इसे दूर करने के लिए शारीरिक अभ्यास करें। इससे आप स्पष्टता महसूस करेंगे।’’

2012 में टाइम 100 सूची में शामिल पूर्व अमेरिकी अटॉर्नी जनरल प्रीत भरारा ने कहा ‘‘किसी ने हाल ही में मुझे कहा था कि हंसने के लिए अब भी सब ठीक है। यह बात महत्वपूर्ण है।’’

भारतीय मूल के फीजीशियन और उद्यमी राज पंजाबी ने वह सीख साझा की जो उन्हें लीबिया के गृह युद्ध से बच कर परिवार सहित नॉर्थ कैरोलीना आने पर उनके पिता से मिली थी।

‘‘लास्ट माइल हेल्थ’’ के सह संस्थापक और सीईओ राज पंजाबी ने कहा ‘‘शरणार्थी के तौर पर हमने अमेरिका में नए सिरे से जीवन शुरू किया। मेरे पिता वेस्ट अफ्रीका से मिला यह सबक दोहराते थे ‘स्थायी तो कुछ भी नहीं है।’’’

पंजाबी ने कहा कि इस सबक ने दुनिया को देखने का उनका एक नजरिया विकसित किया। उन्होंने कहा ‘‘मैं मानता हूं कि मानव होने के नाते हमें वे परिस्थितियां कभी परिभाषित कर ही नहीं सकतीं जिनका हम सामना करते हैं। इन हालात को देख कर कोई कितना भी नाउम्मीद क्यों न हो, चुनौतियों से निपटने का हमारा तरीका ही हमें परिभाषित करता है।’’

टाइम का कहना है कि कुछ माह पहले तक कोई भी यह अनुमान नहीं लगा सकता था कि कोविड-19 के कारण दुनिया में क्या स्थिति होगी।

पत्रिका ने लिखा है ‘‘कई लोगों के लिए रातों रात बड़ी चुनौती उत्पन्न हो गई। शहर बंद हो गए, रोजगार खत्म हो गए, परिवार और मित्रों के सामने एक अनजान और भयावह बीमारी के संक्रमण का खतरा अचानक ही उत्पन्न हो गया।’’

आगे पत्रिका ने कहा है ‘‘भविष्य अचानक ही अनिश्चित हो गया, गर्मी की छुट्टियां, आपके अपनों की सालगिरह, शादियां ... अब ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं लगते।’’

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

(The above story first appeared on LatestLY on Apr 17, 2020 12:11 AM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).