एल्गार परिषद मामला : एनआईए की हिरासत में अब 25 अप्रैल तक रहेंगे आनंद तेलतुंबड़े
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर तेलतुंबड़े ने 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के समक्ष आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
मुंबई, 18 अप्रैल यहां की एक विशेष अदालत ने एल्गार परिषद-कथित माओवादी संबंधों के मामले में दलित अधिकार कार्यकर्ता आनंद तेलतुंबड़े की एनआईए की हिरासत की अवधि 25 अप्रैल तक बढ़ा दी है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों पर तेलतुंबड़े ने 14 अप्रैल को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के समक्ष आत्मसमर्पण किया था जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।
तेलतुंबड़े दलितों के आदर्श डॉ भीमराव आंबेडकर की पोती के पति हैं। शनिवार को उनकी हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें एनआईए की विशेष अदालत के न्यायाधीश ए टी वानखेड़े के समक्ष पेश किया गया।
विशेष लोक अभियोजक प्रकाश शेट्टी ने दलील दी कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है और इसलिए उन्हें सात दिन और हिरासत में रखने की जरूरत है। अदालत ने इस आवेदन को स्वीकार कर लिया।
एजेंसी ने अदालत को बताया कि वह आरोपी के सोशल मीडिया अकाउंट पर मौजूद विषय सामग्री की पुष्टि करना चाहती है।
एजेंसी ने कहा कि मामले के सह-आरोपी के पास से बड़ी मात्रा में दस्तावेज प्राप्त हुए जिनकी उनसे पुष्टि कराने की जरूरत है।
इसने कहा कि आरोपी को भाकपा (माओवादी) से निधि प्राप्त हुई और उसके एवं प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन से जुड़े अज्ञात लोगों के बीच “गहरी साजिश’’ हुई थी जिसकी जांच किए जाने की जरूरत है।
तेलतुंबड़े के अलावा मामले के सह आरोपी नागरिक अधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा ने भी 14 अप्रैल को दिल्ली में एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। उनकी अग्रिम जमानत याचिका को भी शीर्ष अदालत ने खारिज कर दिया था। वह फिलहाल राष्ट्रीय राजधानी में जांच एजेंसी की हिरासत में हैं।
माओवादियों से संबंध के आरोप में तेलतुंबड़े, नवलखा और नौ अन्य नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) के तहत मामले दर्ज किये गये हैं।
इन कार्यकर्ताओं को शुरूआत में कोरेगांव-भीमा में भड़की हिंसा के बाद पुणे पुलिस ने गिरफ्तार किया था।
पुलिस के अनुसार इन लोगों ने 31 दिसम्बर, 2017 को पुणे में आयोजित एल्गार परिषद की बैठक में भड़काऊ भाषण और बयान दिये थे जिसके अगले दिन हिंसा भड़क गई थी।
पुलिस ने कहा कि ये कार्यकर्ता प्रतिबंधित माओवादी समूहों के सक्रिय सदस्य हैं। इसके बाद यह मामला एनआईए को सौंप दिया गया था।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)
(The above story first appeared on LatestLY on Apr 18, 2020 05:13 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

