बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने कहा कि भारत की चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर कभी सवाल नहीं किए जाते हैं तो इसका श्रेय निर्वाचन आयोग को जाता है।
उन्होंने कहा कि अब तक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्त कुल मिलाकर निष्पक्ष रहे हैं।
महताब का कहना था, ‘‘हमारा बुनियादी ध्यान चयन समिति में प्रधान न्यायाधीश के नहीं होने पर केंद्रित नहीं होना चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करने पर होना चाहिए कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव कराने के संबंध में आयोग का ढांचा मजबूत रहे।’’
भाजपा के शंकर लालवानी ने कहा कि देश में ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ की मांग को पूरा किया जाना चाहिए।
भाजपा के संजय सेठ ने कहा कि यह विधेयक भारतीय निर्वाचन व्यवस्था में बदलाव करेगा और नए प्रयोग के लिए द्वार खोलेगा।
एआईएमआईएम के असदु्दीन ओवैसी ने आरोप लगाया कि यह पक्षपात पूर्ण विधेयक है।
उन्होंने कहा कि यह विधेयक उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ के आदेश को पलटने वाला है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह आयोग ‘‘प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छाया में काम करे’’, यह सुनिश्चित करने के लिए विधेयक लाया गया है।
ओवैसी ने कहा कि चयन समिति में प्रधान न्यायाधीश को शामिल करने से चुनाव आयोग को लेकर जनता में भरोसा जगेगा।
उन्होंने कहा, ‘‘मेरा सुझाव है कि चयन में विधि एवं न्याय संबंधी स्थायी समिति की भूमिका होनी चाहिए। चुनाव आयुक्तों के चयन के समय स्थायी समिति इनसे सवाल-जवाब करे।’’
हैदराबाद से लोकसभा सदस्य ने कहा कि इस तरह के विधेयक के पारित होने के बाद चुनाव आयोग के प्रति जनता का भरोसा कम होगा तथा यह लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है।
भाजपा सांसद किरीट सोलंकी ने कहा कि विधेयक से चुनावी व्यवस्था मजबूत होगी तथा लोकतंत्र को भी ताकत मिलेगी।
तेलुगू देसम पार्टी के सांसद जयदेव गल्ला ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश को भी चुनाव आयुक्तों की नियुक्त की प्रक्रिया में शामिल करने के बारे में सरकार को विचार करना चाहिए।
भाजपा के सुधीर गुप्ता ने कहा कि इस विधेयक से निर्वाचन व्यवस्था मजबूत होगी।
जारी हक वैभव
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