देश की खबरें | निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने कहा: पुनरीक्षण की कवायद समावेशी है
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नयी दिल्ली, आठ जुलाई निर्वाचन आयोग के अधिकारियों ने बिहार की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर विपक्षी दलों द्वारा निशाना साधने के बीच मंगलवार को कहा कि यह प्रक्रिया ‘‘समावेशी’’ है।
विपक्ष ने मतदाता सूची पुनरीक्षण के लिए चुनाव आयोग पर हमले तेज कर दिए हैं। उनका कहना है कि इस कवायद से करोड़ों मतदाता मताधिकार से वंचित सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को चुनावी राज्य बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 10 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमत हो गया।
इस साल के अंत में बिहार में चुनाव से पहले विशेष गहन पुनरीक्षण करने के चुनाव आयोग के फैसले के खिलाफ कांग्रेस, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी), शिवसेना (उबाठा), समाजवादी पार्टी, झामुमो, माकपा और भाकपा (माले) लिबरेशन समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं की संयुक्त याचिका शीर्ष अदालत में दायर की है। कई दूसरी याचिकाएं भी दायर की गईं हैं।
आयोग के अधिकारियों का कहना है कि पुनरीक्षण की कवायद सर्व-समावेशी है क्योंकि यह बिहार के मौजूदा 7,89,69,844 मतदाताओं तक पहुंच रही है।
उन्होंने कहा कि मतदाता का नाम, पता, पुरानी फोटो जैसे विवरणों के साथ पहले से भरे हुए गणना फॉर्म प्रत्येक मौजूदा मतदाता को उपलब्ध कराए जाते हैं।
पहले से भरे हुए गणना फॉर्म 7.69 करोड़ या 97.42 प्रतिशत मतदाताओं को वितरित किए गए हैं।
बूथ स्तर के अधिकारी भरे हुए गणना फॉर्म इकट्ठा करने के लिए प्रत्येक घर में कम से कम तीन बार जा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी छूट न जाए।
उन्होंने बताया कि घरों तक जाने का पहला चरण पूरा हो चुका है और दूसरा चरण जारी है। यह पाया गया कि कई मतदाताओं की मृत्यु हो गई या वे स्थानांतरित हो गए या पलायन कर गए।
गणना फॉर्म जमा करने वाले सभी लोगों को एक अगस्त को प्रकाशित होने वाले मसौदा मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ईआरओ) उन सभी निर्वाचकों को सम्मिलित करके निर्वाचक नामावली तैयार करेंगे जिनके गणना प्रपत्र 25 जुलाई से पहले प्राप्त हो चुके हैं।
उन्होंने रेखांकित किया कि पात्रता दस्तावेज एक सितंबर को समाप्त होने वाले दावों और आपत्तियों की अवधि के दौरान अलग से भी जमा किए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि एक निर्वाचक की पात्रता संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार है, जिसे लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 16 और 19 के साथ जोड़कर देखा जाता है।
वह व्यक्ति जो भारत का नागरिक है, न्यूनतम आयु 18 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए, निर्वाचन क्षेत्र में सामान्य रूप से निवासी और किसी भी कानून के तहत अयोग्य नहीं है, मतदाता सूची में शामिल होने के लिए पात्र है।
नाम नहीं शामिल करने का काम केवल जांच के बाद ही होगा। निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के आदेश को जिला अधिकारी/सीईओ के पास अपील की जा सकती है।
मसौदा मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद, ईआरओ प्रस्तावित मतदाताओं की पात्रता की जांच करेगा और दस्तावेजों और जमीनी रिपोर्ट के आधार पर संतुष्ट होगा।
अधिकारियों ने कहा कि ईआरओ के फैसले से असंतुष्ट कोई भी व्यक्ति डीएम के पास अपील कर सकता है और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के अनुसार, डीएम के आदेश के खिलाफ सीईओ के समक्ष दूसरी अपील की जा सकती है।
हक
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