ताजा खबरें | चुनाव विधेयक चर्चा दो रास
Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. आप सदस्य ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार आयुक्तों की नियुक्ति में अंतिम फैसला सरकार को होगा और सरकार जिसे चाहे, उसे आयुक्त बना सकती है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समिति में दो प्रतिनिधि सरकार के होंगे और ऐसे में सरकार जो चाहे, वह फैसला कर सकती है।
आप सदस्य ने कहा कि विधेयक के प्रावधानों के अनुसार आयुक्तों की नियुक्ति में अंतिम फैसला सरकार को होगा और सरकार जिसे चाहे, उसे आयुक्त बना सकती है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित समिति में दो प्रतिनिधि सरकार के होंगे और ऐसे में सरकार जो चाहे, वह फैसला कर सकती है।
बीजू जनता दल (बीजद) के अमर पटनायक ने विधेयक का स्वागत करते हुए कहा कि भारत में अब तक निर्वाचन आयुक्तों की नियुक्ति कार्यपालिका द्वारा ही की जाती रही और आयोग ने सराहनीय काम किया है। उन्होंने 1977 के आम चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय आशंका जतायी जा रही थी कि देश में स्वतंत्र चुनाव नहीं होंगे। लेकिन उस समय भी स्वतंत्र चुनाव हुए और सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस को हार का मुंह देखना पड़ा।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के एडी सिंह ने विधेयक का विरोध करते हुए कहा कि आज भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का एक दुखद दिन है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विभिन्न संस्थाओं के अधिकारों में कटौती करने का प्रयास कर रही है। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि आज की स्थिति आपातकाल से भी खराब है और अघोषित आपातकाल के समान है।
सदन के नेता पीयूष गोयल ने सिंह के बयान का प्रतिवाद करते हुए यह कहना उचित नहीं है कि स्थिति आपातकाल से भी खराब है।
माकपा के जॉन ब्रिटास ने विधेयक का विरोध किया और कहा कि एक दिन पहले ही सरकार अनुच्छेद 370 से जुड़े मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का स्वागत कर रही थी और एक दिन बाद ही न्यायालय के फैसले के उलट प्रस्ताव कर रही है। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों से निर्वाचन आयोग की स्वतंत्रता प्रभावित होगी और इसके घातक परिणाम होंगे।
जद (यू) के रामनाथ ठाकुर ने विधेयक का विरोध किया और एक दिन पहले ही उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का सत्ता पद्वा द्वारा स्वागत किया जा रहा था और आज न्यायालय के ही एक आदेश के खिलाफ विधेयक लाया गया है। उन्होंने विधेयक को वापस लेने की मांग की और कहा कि निष्पक्ष एवं स्वतंत्र चुनाव के लिए निष्पक्ष आयोग जरूरी है।
उन्होंने कहा कि सरकार को व्यापक मशविरा एवं शोध के बाद कोई विधेयक लाना चाहिए। उन्होंने इस विधेयक को प्रवर समिति में भेजने की भी मांग की।
समाजवादी पार्टी के रामगोपाल यादव ने दावा किया कि निर्वाचन आयोग ने ज्ञापन देने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा कि मुरादाबाद में हजारों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
यादव ने कहा कि निर्वाचन आयोग में निष्पक्ष लोगों का होना जरूरी है और अगर ऐसा नहीं होता है तो लोकतंत्र का क्या मतलब रह जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार की नीयत को लेकर लोगों को संदेह है। उन्होंने सरकार से कहा कि उसे ऐसे लोगों को आयोग में मनोनीत करना चाहिए जिनके पास अंतरात्मा हो।
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