देश की खबरें | विपक्ष को दबाने के लिए रॉलेक्ट अधिनियम लाने की कोशिश हो रही : सुले

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में शहरी नक्सलवाद के खिलाफ प्रस्तावित कानून की तुलना औपनिवेशिक रॉलेक्ट अधिनियम से करते हुए आशंका जताई कि सरकार की आलोचना करने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ इसका दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रभावी रूप से पुलिस राज स्थापित हो सकता है।

मुंबई, 15 मार्च राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र में शहरी नक्सलवाद के खिलाफ प्रस्तावित कानून की तुलना औपनिवेशिक रॉलेक्ट अधिनियम से करते हुए आशंका जताई कि सरकार की आलोचना करने वाले व्यक्तियों या संगठनों के खिलाफ इसका दुरुपयोग किया जा सकता है, जिससे प्रभावी रूप से पुलिस राज स्थापित हो सकता है।

सुले ने मांग की कि सरकार विधेयक के मसौदे की समीक्षा करे और यह सुनिश्चित करे कि संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन न हो।

‘महाराष्ट्र विशेष सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक, 2024’ विधेयक राज्य में नक्सलवाद से निपटने के लिए पहला कानून बन जाएगा। इसमें गैरकानूनी गतिविधियों से निपटने में सरकार और पुलिस तंत्र को कई शक्तियां देने का प्रस्ताव है। इस अधिनियम के अंतर्गत पंजीकृत सभी अपराध संज्ञेय एवं गैर-जमानती होंगे।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पिछले साल दिसंबर में राज्य विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के दौरान विधेयक को पुनः पेश करते हुए कहा था कि कानून का उद्देश्य शहरी नक्सलियों के अड्डे बंद करना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि प्रस्तावित कानून वास्तविक असहमति की आवाजों को दबाने के खिलाफ नहीं है।

सुले ने शनिवार को दावा किया कि यह विधेयक नागरिकों के मौलिक अधिकारों को कमतर करेगा।

राकांपा (एसपी) की कार्यकारी अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी पोस्ट में कहा, ‘‘इस विधेयक के जरिए आम लोगों से सरकार के खिलाफ बोलने का अधिकार छीन लिया जाएगा। एक स्वस्थ लोकतंत्र में असहमतिपूर्ण विचारों का सम्मान किया जाता है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोकतंत्र का सिद्धांत विपक्षी आवाजों को भी महत्व देता है, क्योंकि वे सुनिश्चित करते हैं कि सत्ता में बैठे लोग जवाबदेह रहें और जनमत का सम्मान करें।’’

सुले ने कहा कि प्रस्तावित कानून में ‘‘अवैध कृत्यों’’ की परि से सरकारी एजेंसियों को असीमित शक्तियां प्रदान की गई हैं।

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