देश की खबरें | शिकागो एक्सचेंज में तेजी के कारण खाद्य तेल तिलहनों में मजबूती का रुख
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. शिकागो एक्सचेंज में शुक्रवार देर रात को सोयाबीन तेल में ‘ऊपरी सर्किट’ लगाये जाने के बाद शनिवार को दिल्ली तेल तिलहन बाजार में लगभग सभी तेल तिलहन के भाव मजबूती दर्शाते बंद हुए।
नयी दिल्ली, एक जुलाई शिकागो एक्सचेंज में शुक्रवार देर रात को सोयाबीन तेल में ‘ऊपरी सर्किट’ लगाये जाने के बाद शनिवार को दिल्ली तेल तिलहन बाजार में लगभग सभी तेल तिलहन के भाव मजबूती दर्शाते बंद हुए।
बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि कल रात शिकागो एक्सचेंज में सोयाबीन तेल पर ‘अपर सर्किट’ लगाना पड़ा और इसी दर पर यह बंद हुआ। अपर सर्किट तब लगाया जाता है जब किसी जिंस के दाम एक्सचेंज में एक मूल्य सीमा को लांघने लगते हैं। लेकिन इसका उतना असर देशी कारोबार में नहीं हुआ क्योंकि सूरजमुखी तेल की नरमी ने स्थिति को संभाले रखा। शिकागो एक्सचेंज में सोमवार, मंगलवार को छुट्टी है और बुधवार को ही बाजार खुलने के बाद आगे के रुख का पता लगेगा।
सूत्रों ने कहा कि पिछले साल एक समय सूरजमुखी तेल का भाव 2,500 डॉलर टन था तब लग रहा था कि रूस और यूक्रेन के संकट के कारण सूरजमुखी तेल की कमी है या उत्पादन पहले से भी कम है। लेकिन जब मौजूदा समय में इस खाद्यतेल (सूरजमुखी तेल) का भाव लगभग 1,000 डॉलर टन हो गया है तो ना जाने कहां से इतना तेल आने लगा जिसे देखकर लगता है कि इसे स्टॉक करके रखा गया था। वैसे देखा जाये तो सूरजमुखी के उत्पादन की मात्रा अन्य तेलों से कम है पर इसके भाव इस कदर नीचे हैं कि आयातित सोयाबीन की खपत के साथ बाकी तेल तिलहनों का खपना दूभर कर दिया है। सूरजमुखी तेल (जिसे देश में व्यापार जगत के कुछ लोग ‘राजा तेल’ भी बोलते हैं) खाद्यतेलों जब सस्ता होगा तो कोई अन्य खाद्यतेल क्यों मंगायेगा?
सूत्रों ने कहा कि खाद्यतेलों की खपत आने वाले समय में और बढ़ेगी और उन स्थितियों का सामना देश में तेल तिलहन उत्पादन बढ़ाकर, देशी तेल तिलहन का बाजार बनाकर ही टिकाऊ ढंग से किया जा सकता है और किसी भी सूरत में इस जरुरत के लिए आयात पर निर्भरता आत्मघाती साबित हो सकता है। सस्ते सूरजमुखी तेल के असर का पता इस बात से भी लगाया जा सकता है कि देश में तिलहन खेती का रकबा पहले से घटता दिख रहा है यानी किसान अपनी ऊपज न खपने को लेकर परेशान हैं। किसान, उपभोक्ता भी हैं और उन्हें अपने फसल न खपने की टीस भी है।
सूत्रों ने कहा कि तेल तिलहन मामले में आत्मनिर्भरता नहीं मिल पाने में कुछ उन समीक्षकों का भी हाथ है जो खाद्यतेलों के दाम में मामूली वृद्धि पर भी हो हल्ला मचाते हैं और खाद्यतेलों से लगभग छह-सात गुना अधिक खपत वाले दूध और दुग्ध उत्पादों के दाम बढ़ने का कभी कोई हिसाब किताब नहीं रखते।
उन्होंने कहा कि सरकार एक रास्ते से आम खाद्यतेल उपभोक्ताओं को सस्ता खाद्यतेल देना सुनिश्चित कर सकती है कि वह सस्ता आयात कर उसे राशन की दुकानों से बंटवाये जैसा सफल प्रयास पहले उत्तर प्रदेश में हुआ है। सरकार को मौजूदा तेल तिलहन उद्योग और देश के किसानों की चिंता करने का वक्त है जिसपर विचार कर उसे तत्काल उपचारात्मक कदम उठाना होगा।
शनिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,050-5,150 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,655-6,715 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,650 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,480-2,755 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,100 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,700 -1,780 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,700 -1,810 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,400 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 8,700 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,400 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 9,600 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 8,650 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,215-5,280 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 4,980-5,045 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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