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जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में सुधार, सूरजमुखी तेल पहली बार पामोलीन से नीचे

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल, पामोलीन एवं बिनौला तेल कीमतों में सुधार रहा, जबकि सामान्य कारोबार के दौरान मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तेलों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए। तेल-तिलहन कारोबार के इतिहास में पहली बार सूरजमुखी तेल का दाम कम आयवर्ग एवं होटल एवं रेस्तरां में इस्तेमाल किये जाने वाले पामोलीन से भी कम हो गए हैं।

जरुरी जानकारी | खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में सुधार, सूरजमुखी तेल पहली बार पामोलीन से नीचे

नयी दिल्ली, 30 मार्च विदेशी बाजारों में तेजी के रुख के बीच दिल्ली तेल- तिलहन बाजार में बृहस्पतिवार को सरसों तेल-तिलहन, सोयाबीन तिलहन, कच्चा पामतेल, पामोलीन एवं बिनौला तेल कीमतों में सुधार रहा, जबकि सामान्य कारोबार के दौरान मूंगफली तेल-तिलहन और सोयाबीन तेलों के भाव पूर्वस्तर पर बंद हुए। तेल-तिलहन कारोबार के इतिहास में पहली बार सूरजमुखी तेल का दाम कम आयवर्ग एवं होटल एवं रेस्तरां में इस्तेमाल किये जाने वाले पामोलीन से भी कम हो गए हैं।

बाजार के जानकार सूत्रों ने कहा कि पिछले कुछ दिन से भारी मात्रा में आयात होने के कारण सूरजमुखी तेल का दाम पामोलीन तेल से भी कम हो गया है। ज्यादातर कम आय वर्ग के बीच खपत होने वाले पामोलीन पर 13.75 प्रतिशत का आयात शुल्क लागू है जबकि सूरजमुखी तेल का शुल्कमुक्त आयात 31 मार्च तक होगा। सरकार को अपने आंकड़ों पर फिर से गौर करना चाहिये कि क्या सूरजमुखी तेल का थोक दाम पामोलीन से 20 डॉलर प्रति टन नीचे हो गया है ? इसका मतलब पामोलीन के मुकाबले सूरजमुखी तेल 1.5 (डेढ़) रुपये प्रति लीटर सस्ता होना है।

सूत्रों ने कहा कि थोक दाम तो टूट गये हैं मगर खुदरा बाजार में उपभोक्ताओं को सूरजमुखी तेल में गिरावट का लाभ नहीं मिल रहा है।

सूत्रों ने कहा कि शुल्कमुक्त आयात की छूट होने के कारण देश का तेल-तिलहन उद्योग, किसान और उपभोक्ता सभी परेशान हैं। तेल-तिलहन उद्योग इसलिए परेशान है कि देशी तेलों की पेराई उनके लिए नुकसान का सौदा बन गई है, क्योंकि पेराई के बाद इस तेल की लागत बढ़ने के चलते सस्ते आयातित तेलों के आगे यह खप नहीं रहा है। किसान इसलिए परेशान हैं कि उनकी उपज की लागत अधिक बैठने से उनके उत्पाद का बाजार में खपना मुश्किल है। उपभोक्ताओं की शिकायत है कि उन्हें वैश्विक गिरावट के बावजूद खाद्य तेल के लिए ऊंची कीमत चुकानी पड़ रही है।

सूत्रों ने बताया कि वार्षिक खाताबंदी का समय होने के बीच किसानों द्वारा सस्ते दाम पर कम बिकवाली करने से सरसों तेल-तिलहन, बिनौला, सोयाबीन तिलहन कीमतों में सुधार आया। जबकि मलेशिया एक्सचेंज के दो प्रतिशत मजबूत होने से सीपीओ और पामोलीन के दाम में भी सुधार है। सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल- तिलहन और सोयाबीन तेल के दाम पूर्वस्तर पर बंद हुए।

बृहस्पतिवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:

सरसों तिलहन - 5,385-5,435 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली - 6,815-6,875 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,700 रुपये प्रति क्विंटल।

मूंगफली रिफाइंड तेल 2,545-2,810 रुपये प्रति टिन।

सरसों तेल दादरी- 10,900 रुपये प्रति क्विंटल।

सरसों पक्की घानी- 1,710-1,780 रुपये प्रति टिन।

सरसों कच्ची घानी- 1,710-1,830 रुपये प्रति टिन।

तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 11,080 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,980 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,340 रुपये प्रति क्विंटल।

सीपीओ एक्स-कांडला- 8,850 रुपये प्रति क्विंटल।

बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,700 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,300 रुपये प्रति क्विंटल।

पामोलिन एक्स- कांडला- 9,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।

सोयाबीन दाना - 5,285-5,435 रुपये प्रति क्विंटल।

सोयाबीन लूज- 5,045-5,085 रुपये प्रति क्विंटल।

मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।

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(The above story first appeared on LatestLY on Mar 30, 2023 05:06 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).