जरुरी जानकारी | विदेशों में कमजोरी के रुख से खाद्य तेल तिलहन कीमतों में गिरावट
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी बाजारों में कमजोर रुख के बीच स्थानीय दिल्ली बाजार में बुधवार को खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में मामूली गिरावट रही। हालांकि सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल तिलहन और सोयाबीन डीगम तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
नयी दिल्ली, 19 अप्रैल विदेशी बाजारों में कमजोर रुख के बीच स्थानीय दिल्ली बाजार में बुधवार को खाद्य तेल-तिलहन कीमतों में मामूली गिरावट रही। हालांकि सामान्य कारोबार के बीच मूंगफली तेल तिलहन और सोयाबीन डीगम तेल के दाम पूर्वस्तर पर बने रहे।
बाजार सूत्रों ने कहा कि दिल्ली के एक तेल संगठन का दावा है कि उत्पादन अधिक होने के कारण सरसों के दाम पिछले साल के मुकाबले घटे हैं और दिल्ली की मंडी में सरसों तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल जैसे अन्य खाद्यतेलों के भाव 135-140 रुपये लीटर के बीच ही हैं।
इस तेल संगठन के सामने एक सवाल यह उठता है कि जब बंदरगाह पर सूरजमुखी और सोयाबीन तेल के दाम लगभग 96 रुपये लीटर पड़ता है तो फिर ये दिल्ली में खुदरा में 135-140 रुपये क्यों बिक रहा है ? सरसों का थोक दाम वास्तव में दिल्ली में अधिभार सहित 100 रुपये लीटर बैठता है। इसमें सारे खर्च और मुनाफा जोड़ने के बाद खुदरा व्यापारियों को यह तेल लगभग 112 रुपये लीटर के भाव मिलता है और इसमें 4-5 प्रतिशत का मार्जिन जोड़ा जाये तो सरसों तेल का खुदरा दाम लगभग 115-120 रुपये लीटर बैठता है। तो सरसों के दाम 135-140 रुपये लीटर बताना ठीक नहीं है।
खाद्यतेल उद्योग के व्यापारियों का कहना था कि किसानों से सरसों न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से 10-12 प्रतिशत नीचे खरीदने के बावजूद उन्हें सस्ते आयातित तेलों की भरमार की वजह से लगभग पांच रुपये प्रति लीटर का नुकसान है।
सरसों और सोयाबीन तेलों के प्रमुख संगठन ‘मोपा’ और ‘सोपा’ ने देशी तिलहन किसानों के हित में पिछले महीने आयातित तेलों पर आयात शुल्क लगाने की मांग की थी लेकिन एसईए के विचार इनसे अलग हैं और उसने सरकार से बंदरगाहों पर रोके गये शुल्कमुक्त आयातित खाद्यतेलों की खेप पर रोक हटाये जाने की मांग की है।
सूत्रों ने कहा कि देश के तिलहन (सरसों) किसानों की चिंता यह है कि सस्ते आयातित तेलों की भरमार के बीच उनकी फसल कैसे खपे ? उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष पाइपलाईन में 22 लाख टन खाद्यतेल थे जो इस बार लगभग 35 लाख टन तक हैं। लगभग 11 महीने पहले सूरजमुखी का दाम लगभग 2500 डॉलर प्रति टन था और अब 1,050 डॉलर प्रति टन है।
खाद्यतेलों का आयात भी अगले लगभग पांच महीनों की जरुरत के लिये पड़े हैं। ऐसी स्थिति में एसईए की महंगाई बढ़ने की चिंता उचित नहीं है। चिंता तो कम आयवर्ग में खपत होने वाले पामोलीन तेल के लिए जताई जानी चाहिये कि वह गरीबों को सस्ता कैसे मिले जिस तेल पर 13.75 प्रतिशत का आयात शुल्क लगा हुआ है। महंगा बैठने के कारण देश में आयातकों की ओर से आज लगभग 75,000 टन कच्चा पामतेल (सीपीओ) के आयात के अनुबंध को रद्द किये जाने की सूचना है।
सूत्रों ने कहा कि असली दिक्कत तो तेल उद्योग को है कि वह सस्ते आयातित तेलों के आगे बेबस हैं और उन्हें देशी तिलहनों की पेराई में नुकसान हो रहा है।
शिकागो एक्सचेंज में कोई घट बढ़ नहीं है जबकि मलेशिया एक्सचेंज में 1.5 प्रतिशत की गिरावट है।
बुधवार को तेल-तिलहनों के भाव इस प्रकार रहे:
सरसों तिलहन - 5,115-5,210 (42 प्रतिशत कंडीशन का भाव) रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली - 6,840-6,900 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली तेल मिल डिलिवरी (गुजरात) - 16,750 रुपये प्रति क्विंटल।
मूंगफली रिफाइंड तेल 2,550-2,815 रुपये प्रति टिन।
सरसों तेल दादरी- 10,050 रुपये प्रति क्विंटल।
सरसों पक्की घानी- 1,605-1,675 रुपये प्रति टिन।
सरसों कच्ची घानी- 1,605-1,725 रुपये प्रति टिन।
तिल तेल मिल डिलिवरी - 18,900-21,000 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल मिल डिलिवरी दिल्ली- 10,870 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन मिल डिलिवरी इंदौर- 10,600 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन तेल डीगम, कांडला- 9,220 रुपये प्रति क्विंटल।
सीपीओ एक्स-कांडला- 8,800 रुपये प्रति क्विंटल।
बिनौला मिल डिलिवरी (हरियाणा)- 9,550 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन आरबीडी, दिल्ली- 10,250 रुपये प्रति क्विंटल।
पामोलिन एक्स- कांडला- 9,400 रुपये (बिना जीएसटी के) प्रति क्विंटल।
सोयाबीन दाना - 5,365-5,415 रुपये प्रति क्विंटल।
सोयाबीन लूज- 5,115-5,215 रुपये प्रति क्विंटल।
मक्का खल (सरिस्का)- 4,010 रुपये प्रति क्विंटल।
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(The above story first appeared on LatestLY on Apr 19, 2023 09:16 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

