देश की खबरें | ईडी ने तमिलनाडु टीएएसएमएसी मामले में फिर से मारे छापे

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चेन्नई, 16 मई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तमिलनाडु राज्य विपणन निगम (टीएएसएमएसी) से जुड़े धनशोधन मामले में राज्य में शुक्रवार को फिर से छापे मारे। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।

अधिकारियों ने बताया कि धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत टीएएसएमएसी अधिकारियों और एजेंट से जुड़े लगभग 10 स्थानों पर छापेमारी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि कुछ हवाला कारोबारी और धन जमा करने वाले लोगों के परिसर की भी तलाशी ली जा रही है।

तमिलनाडु सरकार के स्वामित्व वाली टीएएसएमएसी की स्थापना 1983 में हुई थी और इसका पंजीकृत कार्यालय चेन्नई में है। राज्य में इसे भारतीय निर्मित विदेशी शराब (आईएमएफएल) और बीयर की थोक आपूर्ति के लिए अनन्य अधिकार प्राप्त हैं। इसके राज्य भर में करीब 43 डिपो और पांच हजार खुदरा इकाइयां हैं।

ईडी ने इस मामले में मार्च में पहली बार छापेमारी की थी।

मद्रास उच्च न्यायालय ने अप्रैल में तमिलनाडु सरकार द्वारा दायर तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया था, जिसमें धन शोधन के एक मामले में छह से आठ मार्च के बीच निगमों के मुख्यालयों पर ईडी द्वारा की गई छापेमारी और जब्ती की कार्रवाई को अवैध घोषित करने का आग्रह किया गया था।

अदालत ने मामले में ईडी द्वारा ‘राजनीतिक प्रतिशोध’ के तहत की गई कार्रवाई के तमिलनाडु सरकार के दावे को भी खारिज कर दिया था और कहा कि ‘‘राजनीति के मामले का फैसला करने के लिए सबसे अच्छे जज हमारे महान राष्ट्र के लोग होंगे’’।

ईडी ने पहले की गई छापेमारी के बाद प्रेस को दिए गए बयान में कहा था कि टीएएसएमएसी के संचालन में कथित अनियमितताएं पाई गई हैं, जिनमें निविदा प्रक्रियाओं में हेराफेरी और शराब की कंपनी के माध्यम से एक हजार करोड़ रुपये का लेनदेन किया गया, जिसका कोई लेखा जोखा नहीं है।

इसमें दावा किया गया है कि मार्च में की गई छापेमारी के दौरान तबादले से जुड़े दस्तावेज, परिवहन और बार लाइसेंस निविदाएं, कुछ शराब की कंपनियों को लाभ पहुंचाने संबंधी दस्तावेज, टीएएसएमएसी के ठेकों से प्रति बोतल 10 से 30 रुपये का अतिरिक्त शुल्क वसूलने से संबंधित सामग्रियां मिली हैं।

इन सब में टीएएसएमएसी के अधिकारी भी शामिल हैं।

एजेंसी ने कहा कि उसे शराब की कंपनियों और टीएएसएमएसी के उच्च अधिकारियों के बीच ‘प्रत्यक्ष’ संचार के रिकॉर्ड मिले हैं, जिससे अधिक ऑर्डर प्राप्त करने और ‘अनुचित’ लाभ प्राप्त करने के प्रयासों का खुलासा हुआ है।

शराब की कंपनियों ने व्यवस्थित रूप से खर्चों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया और विशेष रूप से बोतल बनाने वाली कंपनियों के माध्यम से फर्जी खरीद की, जिससे एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की नकदी हड़प ली, जिसका कहीं हिसाब नहीं था।

ईडी के अनुसार, इस धन का उपयोग टीएएसएमएसी से आपूर्ति ऑर्डर बढ़ाने के लिए रिश्वत के रूप में किया गया।

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