देश की खबरें | ईडी ने 500 करोड़ रुपये के छत्तीसगढ़ चिकित्सा आपूर्ति ‘घोटाला’ मामले में छापे मारे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के चिकित्सा आपूर्ति घोटाले की धन शोधन जांच के तहत बुधवार को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
रायपुर, 30 जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने कथित तौर पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के चिकित्सा आपूर्ति घोटाले की धन शोधन जांच के तहत बुधवार को छत्तीसगढ़ में कई स्थानों पर छापे मारे। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।
यह कथित घोटाला राज्य में पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान का है।
सूत्रों ने बताया कि रायपुर, दुर्ग, भिलाई और आसपास के इलाकों में कुछ सरकारी अधिकारियों, चिकित्सकीय सामान के आपूर्तिकर्ताओं और एजेंट के अलावा कुछ ‘‘बिचौलियों’’ से जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है।
धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत ईडी की जांच अप्रैल में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो/आर्थिक अपराध शाखा (एसीबी/ईओडब्ल्यू) द्वारा छह व्यक्तियों के खिलाफ दाखिल आरोप पत्र से संबंधित है जिसमें 2023 में चिकित्सा उपकरणों और रासायनिक रसायनों की खरीद में कथित अनियमितताओं से राज्य के खजाने को 550 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचने का आरोप लगाया गया है।
एसीबी/ईओडब्ल्यू ने 22 जनवरी को रायपुर स्थित राज्य सरकार द्वारा संचालित छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससीएल) और स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के अधिकारियों के साथ-साथ चार कंपनियों मोक्षित कॉर्पोरेशन (दुर्ग), सीबी कॉर्पोरेशन (दुर्ग), रिकॉर्ड्स एंड मेडिकेयर सिस्टम एचएसआईआईडीसी (पंचकुला, हरियाणा) और श्री शारदा इंडस्ट्रीज (रायपुर) के खिलाफ मामला दर्ज किया था।
ऐसा आरोप है कि इस घोटाले में स्वास्थ्य केंद्रों में इन वस्तुओं की आवश्यकता/उपलब्धता की जांच किए बिना रासायनिक रसायनों और उपकरणों की खरीद की गयी।
एसीबी/ईओडब्ल्यू ने कहा था कि सीजीएमएससीएल ने मोक्षित कॉर्पोरेशन और उसकी मुखौटा कंपनी के साथ मिलीभगत करके जनवरी 2022 से 31 अक्टूबर 2023 के बीच अरबों रुपये की खरीदारी की है।
एसीबी/ईपीडब्ल्यू के 18,000 पृष्ठों के आरोप पत्र में मोक्षित कॉर्पोरेशन के निदेशक शशांक चोपड़ा, बसंत कुमार कौशिक, छिरोद रौतिया, कमलकांत पाटनवार, डॉ अनिल परसाई और दीपक कुमार बंधे का नाम था, जो कथित घोटाले के वक्त सीजीएमएससीएल में तैनात थे।
आरोपपत्र दाखिल किए जाने के दौरान एसीबी/ईओडब्ल्यू के एक अधिकारी ने कहा था, ‘‘कौशिक सीजीएमएससीएल के प्रभारी महाप्रबंधक (उपकरण) और उप प्रबंधक (क्रय एवं संचालन) थे। रौतिया और बांधे बायोमेडिकल इंजीनियर थे। पाटनवार उस समय उप प्रबंधक (उपकरण) और परसाई उस समय उप निदेशक (भंडार) थे।’’
अधिकारी के अनुसार, चोपड़ा को 29 जनवरी को गिरफ्तार किया गया था, जबकि बाकी को मार्च में हिरासत में लिया गया था।
राज्य सरकार की जांच एजेंसी ने दावा किया कि एक मामले में यह पाया गया कि रक्त के नमूने एकत्र करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली ईडीटीए ट्यूब मोक्षित कॉर्पोरेशन से 2,352 रुपये प्रति पीस की दर से खरीदी गई थी, जबकि अन्य संस्थानों द्वारा यही सामग्री अधिकतम 8.50 रुपये की दर से खरीदी गई थी।
एसीबी/ईओडब्ल्यू ने कहा था कि सीबीसी मशीन, जो खुले बाजार में पांच लाख रुपये में बिकती है, मोक्षित कॉर्पोरेशन द्वारा सीजीएमएससी को कथित तौर पर 17 लाख रुपये में उपलब्ध कराई गई थी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)