देश की खबरें | ईडी ने प्रीति चंद्रा को जमानत देने के विरोध में कहा, 7000 करोड़ रुपये का गबन हुआ

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नयी दिल्ली, 25 जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने ‘यूनिटेक’ के प्रवर्तक संजय चंद्रा की पत्नी प्रीति चंद्रा को जमानत देने के दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश का मंगलवार को विरोध करते हुए शीर्ष अदालत को बताया कि इस कथित घोटाले में मकान खरीदारों के सात हजार करोड़ रुपयों की हेरफेर की गई हैं।

उच्चतम न्यायालय ने 16 जून को उच्च न्यायालय के 14 जून के आदेश पर रोक लगा दी थी और जमानत याचिका को चुनौती देने संबंधी ईडी की याचिका पर प्रीति चंद्रा को नोटिस जारी किया था।

ईडी की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलीसिटर जनरल (एएसजी) एस.वी. राजू ने उच्चतम न्यायालय में दावा किया कि यह मामला बड़े घोटाले से संबंधित है और प्रीति चंद्रा ने इसमें “महत्वपूर्ण भूमिका” निभाई थी।

राजू ने प्रधान न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, “यह यूनिटेक द्वारा मकान खरीदारों के सात हजार करोड़ रुपये गबन करने का मामला है।”

पीठ में न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा भी शामिल हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि उच्च न्यायालय ने कहा था कि वह कंपनी में केवल एक निदेशक थीं और उनके दैनिक मामलों को नियंत्रित करने का कोई सबूत नहीं है।

एएसजी ने कहा, "हमारा मानना है कि उन्होंने सक्रिय भूमिका निभाई। वह महज एक निदेशक नहीं थीं। यह कोई साधारण मामला नहीं है जैसा कि उन्होंने इसे बनाने की कोशिश की है।"

याचिका पर सुनवाई बुधवार को भी जारी रहेगी।

शीर्ष अदालत ने 16 जून को मामले में पारित आदेश में कहा था, “अगले आदेश तक 14 जून, 2023 के आदेश पर रोक रहेगी।”

उच्च न्यायालय ने 14 जून को प्रीति चंद्रा को जमानत दी थी। हालांकि अदालत ने कहा कि था कि प्रवर्तन निदेशालय ने इस आदेश को चुनौती देने के लिए समय मांगा है, इसलिए 16 जून तक यह आदेश प्रभावी नहीं होगा।

ईडी ने यूनिटेक समूह और उसके प्रर्वतकों के खिलाफ धनशोधन निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मौजूदा मामला दर्ज किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कंपनी के मालिकों- ‘संजय चंद्रा और अजय चंद्रा’ ने अवैध रूप से साइप्रस और केमैन द्वीप समूह में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किया था।

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