देश की खबरें | ईडी ने बिहार पीएफआई मामले में धनशोधन की जांच शुरू की

नयी दिल्ली, 19 जुलाई प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चरमपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) से कथित संबंध रखने और ‘भारत-विरोधी’ गतिविधियों में शामिल होने की योजना बनाने के लिए बिहार पुलिस द्वारा हाल ही में तीन व्यक्तियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आए ‘आतंकवादी मॉड्यूल’ के मद्देनजर धनशोधन की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

झारखंड के एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी मोहम्मद जलाउद्दीन और अतहर परवेज को 13 जुलाई को राज्य की राजधानी पटना के फुलवारी शरीफ इलाके से गिरफ्तार किया गया था, जबकि नूरुद्दीन जंगी को तीन दिन बाद उत्तर प्रदेश एटीएस ने बिहार पुलिस के अनुरोध पर लखनऊ से गिरफ्तार किया था।

पटना पुलिस ने कहा था, ‘‘वे (जलाउद्दीन और परवेज) स्थानीय लोगों को तलवार और चाकुओं का इस्तेमाल करना सिखा रहे थे और उन्हें सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसा रहे थे। उनके पीएफआई से भी संबंध हैं।’’

उन्होंने बताया कि उनके पास से इस्लामी चरमपंथ से जुड़े कई आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

उत्तर प्रदेश के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने कहा था कि नूरुद्दीन ने पूछताछ के दौरान ‘कबूल’ किया है कि वह 2015 में पीएफआई के दरभंगा जिलाध्यक्ष के संपर्क में आया था और तब से संगठन से जुड़ा हुआ है।

अधिकारियों ने कहा कि ईडी ने पटना पुलिस की इस प्राथमिकी का संज्ञान लिया है और पीएफआई, उसके सदस्यों और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ की जा रही व्यापक जांच में इसे समाहित किया गया है।

अधिकारियों के अनुसार, पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए आरोपियों से एजेंसी पूछताछ करेगी और यह पता लगाने का प्रयास करेगी कि धनशोधन के जरिये उनके द्वारा किए गए लेन-देन से ‘अपराध’ की उत्पत्ति हुई है।

एजेंसी ने पीएफआई और उसके पदाधिकारियों के खिलाफ लखनऊ में एक विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष दो आरोप पत्र दायर किए हैं।

एजेंसी ने पिछले महीने इन जांचों के तहत पीएफआई और उसके 'सहयोगी' संगठन रिहैब इंडिया फाउंडेशन की 68.62 लाख रुपये से अधिक की बैंक जमा राशि कुर्क की थी।

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