जरुरी जानकारी | अर्थव्यवस्था में पहली तिमाही में रिकार्ड 23.9% की गिरावट, कृषि छोड़ सभी क्षेत्रों का बुरा हाल

नयी दिल्ली, 31 अगस्त कोरोना वायरस महामारी के प्रकोप और उसकी रोकथाम के लिये लगाए गए ‘लॉकडाउन’ से देश की पहले से नरमी पड़ रही अर्थव्यवस्था पर और बुरा असर पड़ा है। सोमवार को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2020-21 में अप्रैल-जून के दौरान अथर्व्यवस्था में 23.9 प्रतिशत की अब तक की सबसे बड़ी तिमाही गिरावट आयी है।

इस दौरान कृषि को छोड़कर विनिर्माण, निर्माण और सेवा समेत सभी क्षेत्रों का प्रदर्शन खराब रहा है

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दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में इससे पहले जनवरी-मार्च तिमाही में 3.1 प्रतिशत और पिछले साल अप्रैल-जून में 5.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

तिमाही आंकड़े 1996 से जारी किये जा रहे हैं और उस समय से यह अबतक की सबसे बड़ी गिरावट है। इतना ही नहीं विश्लेषक जो अनुमान जता रहे थे, गिरावट उससे भी बड़ी है।

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महामारी की वजह से दुनिया के विभिन्न देशों में जीडीपी में ऐतिहासिक गिरावट हो रही है लेकिन भारत में स्थिति बिगड़ रही है। एक दिन में कोरोना वायरस संक्रमण के 78,000 से अधिक मामले आने के साथ कुल आंकड़ा 35 लाख को पार कर गया है। भारत इस मामले में केवल अमेरिका और ब्राजील से पीछे है।

रूस की अर्थव्यवस्था में अप्रैल-जून के दौरान 8.5 प्रतिशत की गिरावट आयी। हालांकि चीन में इसी दौरान 3.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

चीन में इस साल जनवरी-मार्च में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में 6.8 प्रतिशत की गिरावट आयी थी। उस समय वहां कोरोना वायरस महामारी चरम पर थी। पहली तिमाही में रूस में 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।

अमेरिका में अप्रैल-जून तिमाही में अर्थव्यवस्था में रिकार्ड 32.9 प्रतिशत, इटली में 12.8 प्रतिशत और तुर्की की अर्थव्यवस्था में 9.9 प्रतिशत की गिरवट आयी।

अमेरिका में महामारी को रोकने के लिये कारोबारी गतिविधियां बंद होने से करोड़ों लोगों को रोजगार से हाथ धोना पड़ा है और बेरोजगारी दर बढ़कर 14.7 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गयी।

मुख्य आर्थिक सलाहकार के वी सुब्रमणियम ने पीटीआई- से कहा कि पहली तिमाही के आर्थिक प्रदर्शन पर मुख्य रूप से बाह्य कारकों का प्रभाव पड़ा और यह असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया गया है।

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