जरुरी जानकारी | कोविड-19 को लेकर अनिश्चितताओं के बीच अर्थशास्त्रियों ने ब्याज दरों को यथावत रखने का स्वागत किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. अर्थशास्त्रियों ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले को कोविड-19 को लेकर अनिश्चितताओं तथा मुद्रास्फीति में वृद्धि के बीच सही कदम बताया है।

मुंबई, छह अगस्त अर्थशास्त्रियों ने भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा मौद्रिक नीति समीक्षा में ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले को कोविड-19 को लेकर अनिश्चितताओं तथा मुद्रास्फीति में वृद्धि के बीच सही कदम बताया है।

छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने रेपो दर को चार प्रतिशत पर ही कायम रखने का फैसला किया है। इसके अलावा एमपीसी ने वृद्धि को प्रोत्साहन के लिए अपने नरम रुख को कायम रखने का फैसला किया है।

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एसबीआई समूह के मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्य कांति घोष ने कहा, ‘‘नीति दरों को यथावत रखने का फैसला उचित है। आर्थिक वृद्धि, मुद्रास्फीति तथा बाहरी मांग को लेकर स्थिति अभी अनिश्चित है, जिसके मद्देनजर यह कदम सही है।’’ उन्होंने कहा कि वृहद आर्थिक मोर्चे पर परिदृश्य अनिश्चित है। रिजर्व बैंक यह बताने से बचा है कि कोविड-19 की वजह से सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर में कितनी गिरावट आएगी।

इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के प्रमुख अर्थशास्त्री एवं निदेशक (सार्वजनिक वित्त) सुनील कुमार सिन्हा ने कहा कि हाल के समय में खुदरा मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी की वजह से एमपीसी ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया।

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डीबीएस ग्रुप रिसर्च की अर्थशास्त्री राधिका राव ने कहा कि 2020 की चौथी तिमाही से मुद्रास्फीति नरम पड़ेगी, क्योंकि कोविड-19 का असर कम होगा। उस समय अनुकूल आधार प्रभाव की स्थिति होगी। यदि उस समय आर्थिक गतिविधियां सुस्त रहती हैं, तो केंद्रीय बैंक के पास अपने रुख को नरम करने की गुंजाइश होगी। राव ने कहा, ‘‘हम अपने इस अनुमान पर कायम है कि इस साल रेपो दर में आधा प्रतिशत की और कटौती होगी।’’

केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि एमपीसी का कहना है कि आगे और मौद्रिक कार्रवाई की गुंजाइश है, लेकिन इसका इस्तेमाल समझदारी से करने की जरूरत है, ताकि अधिकतम लाभ हासिल किया जा सके।

डेलॉयट इंडिया की अर्थशास्त्री रुमकी मजूमदार ने कहा कि स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन तथा आपूर्ति पक्ष की दिक्कतों की वजह से मुद्रास्फीति के ऊंचा रहने का अनुमान है। ऐसे में रिजर्व बैंक ने नीतिगत ब्याज दरों के मोर्चे पर यथास्थिति को कायम रखा है।

केपीएमजी इंडिया के भागीदार एवं प्रमुख (वित्तीय जोखिम प्रबंधन) राजोसिक बनर्जी ने कहा कि ऋण पुनर्गठन की सुविधा उपलब्ध होने से कॉरपोरेट और व्यक्तिगत कर्जदारों पर दबाव कुछ कम हो सकेगा।

एस्सार पोर्ट्स के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजीव अग्रवाल ने कहा कि कोविड-19 से संबंधित दबाव के लिए समाधान ढांचा एक सही दिशा में उठाया गया कदम है। इसके जरिये बैंक पात्र कंपनियों के लिए समाधान योजना का क्रियान्वयन कर सकेंगे।

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