देश की खबरें | डीएसटी ने राज्य विज्ञान नीति पर संसद में सवालों के जवाबों पर स्पष्टीकरण दिया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने राज्य विज्ञान नीतियों के कार्यान्वयन के संबंध में संसदीय प्रश्नों के उत्तर में विरोधाभास के दावों का खंडन करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया है।

नयी दिल्ली, दो अप्रैल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने राज्य विज्ञान नीतियों के कार्यान्वयन के संबंध में संसदीय प्रश्नों के उत्तर में विरोधाभास के दावों का खंडन करते हुए एक स्पष्टीकरण जारी किया है।

विभाग ने कहा कि 2022 और 2025 में दिए गए दो उत्तर अलग-अलग प्रश्नों पर आधारित थे और उनमें कोई विरोधाभास नहीं था।

विभाग ने सफाई दी कि 21 जुलाई, 2022 को संसद में एक प्रश्न में पूछा गया था कि क्या किसी राज्य सरकार ने स्वतंत्रता के बाद से विज्ञान नीति शुरू की है।

जवाब में डीएसटी ने गुजरात की विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार (एसटीआई) नीति 2018 का उदाहरण दिया था।

विभाग ने स्पष्ट किया कि जवाब में गुजरात को ऐसी नीति लागू करने वाला पहला राज्य नहीं बताया गया है, बल्कि केवल इस बात की पुष्टि की गई है कि राज्यों ने ऐसी पहल की है।

इसके विपरीत, 13 मार्च, 2025 को संसद में पूछे गए प्रश्न में विशेष रूप से उन राज्यों की सूची मांगी गई थी, जिन्होंने विज्ञान नीतियों को लागू किया था और यह बताने को कहा गया था कि स्वतंत्रता के बाद ऐसी नीति लागू करने वाला पहला राज्य कौन सा था।

डीएसटी के जवाब में विस्तृत सूची दी गई, जिसमें केरल (1974 और 2002), गुजरात (2018), हिमाचल प्रदेश (2021) और मध्यप्रदेश (2022) का उल्लेख किया गया।

जवाब में केरल को 1974 में विज्ञान नीति पेश करने वाले पहले राज्य के रूप में बताया गया था।

विभाग ने इस बात पर जोर दिया कि कथित विरोधाभास उत्तरों में किसी विसंगति के बजाय प्रश्नों की प्रकृति में अंतर से उपजा है।

यह स्पष्टीकरण इन खबरों के मद्देनजर आया है कि डीएसटी के बयानों में विसंगतियां हैं।

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