नयी दिल्ली, 10 सितंबर दिल्ली राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएसएलएसए) ने बृहस्पतिवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को सूचित किया कि राष्ट्रीय राजधानी में शहरी आश्रय सुधार बोर्ड द्वारा चलाए जा रहे रैन बसेरों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति "संतोषजनक स्तर से नीचे" है।
डीएसएलएसए ने कहा कि रैन बसेरों में सैनिटाइजर, मास्क, प्राथमिक चिकित्सा, बिस्तर की कमी है तथा वहां शौचालयों की भी कमी है तथा साफ-सफाई के प्रबंध भी ठीक नहीं हैं।
न्यायमूर्ति हिमा कोहली और न्यायमूर्ति एस प्रसाद की पीठ ने 18 अगस्त को डीएसएलएसए को यह पता करने का निर्देश दिया था कि क्या दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) द्वारा चलाए जा रहे रैन बसेरों का उपयोग करने वालों के लिए भूख से राहत देने वाले शिविरों को जारी रखने की जरूरत है।
अदालत के निर्देश पर पेश स्थिति रिपोर्ट मे ये तथ्य हैं।
पीठ का 18 अगस्त का निर्देश एनजीओ रोज़ी रोटी अधिकार अभियान द्वारा दायर एक याचिका पर जारी किया गया था। याचिका में अनुरोध किया गया था कि मुख्यमंत्री कोरोना सहायता योजना या किसी अन्य स्कीम के तहत सूखा राशन प्रदान करने की योजना फिर से शुरू करने के लिए दिल्ली सरकार को निर्देश दिया जाए।
शहर भर में 54 रैन बसेरों का निरीक्षण करने के बाद डीएसएलएसए ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि यह देखा और गौर किया गया कि कुछ रैन बसेरों की स्थिति बुनियादी सुविधाओं की स्थिति के दृष्टिकोण से संतोषजनक नहीं है, खासकर मौजूदा समय में जब देश एक महामारी का मुकाबला कर रहा है।
रिपोर्ट पर गौर करने के बाद पीठ ने डीयूएसआईबी को डीएसएलएसए को मिली "विशिष्ट कमियों" का जवाब देने के लिए स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा।
मामले में अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि कुछ रैन बसेरों में रह रहे लोग बिना गद्दे के जमीन पर सो रहे थे। वहीं कई स्थानों पर लोगों की संख्या ज्यादा थी।
रैन बसेरों में उपलब्ध कराए गए भोजन के संबंध में रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां रहने वाले लोग आम तौर पर भोजन की मात्रा और गुणवत्ता से संतुष्ट हैं। हालांकि कुछ लोगों ने भोजन की गुणवत्ता के बारे में शिकायतें की।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY