देश की खबरें | मादक पदार्थ मामला: शीर्ष अदालत का बिक्रम सिंह मजीठिया को एसआईटी के सामने पेश होने का आदेश

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब के पूर्व मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को उनके खिलाफ मादक पदार्थ मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।

नयी दिल्ली, चार मार्च उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को पंजाब के पूर्व मंत्री एवं शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को उनके खिलाफ मादक पदार्थ मामले की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) के समक्ष पेश होने का निर्देश दिया।

न्यायमूर्ति जे के माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने मजीठिया को 17 मार्च को पूर्वाह्न करीब 11 बजे एसआईटी के समक्ष पेश होने का आदेश दिया।

शीर्ष अदालत का यह आदेश तब आया है जब पंजाब सरकार ने कहा कि मजीठिया जांच में सहयोग करने से इनकार कर रहे हैं।

मजीठिया ने उन्हें राजनीतिक कारणों से परेशान किये जाने का आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत से पूछताछ की तारीख तय करने का अनुरोध किया था।

पंजाब के महाधिवक्ता गुरमिंदर सिंह ने कहा कि जांच में सहयोग करना जमानत के लिए अनिवार्य शर्त है और मजीठिया को इसका पालन करना होगा।

शीर्ष अदालत ने आदेश दिया, ‘‘हम प्रतिवादी (मजीठिया) को 17 मार्च को पूर्वाह्न 11 बजे एसआईटी (पटियाला) के समक्ष पेश होने का निर्देश देते हैं। यदि आगे जांच की आवश्यकता होगी, तो प्रतिवादी अगली तारीख को उसी समय उपस्थित होंगे और सहयोग करेंगे।’’

शीर्ष अदालत पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा 10 अगस्त, 2022 को मजीठिया को जमानत दिये जाने के आदेश के खिलाफ पंजाब सरकार की याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि यह मानने के लिए ‘‘उचित आधार’’ है कि वह दोषी नहीं हैं, लेकिन उसने अपनी टिप्पणी को केवल जमानत याचिका के निर्णय तक सीमित रखा।

उच्च न्यायालय ने कहा था कि निचली अदालत को स्वतंत्र रूप से आगे बढ़ना चाहिए।

इस मामले में पटियाला जेल में पांच महीने से अधिक समय बिताने के बाद मजीठिया को रिहा कर दिया गया।

मजीठिया शिअद के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के साले और पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल के भाई हैं।

पंजाब में मादक पदार्थ तस्करी के एक मामले की जांच करने वाले मादक पदार्थ रोधी विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने 2018 में एक रिपोर्ट दी थी जिसके आधार पर मजीठिया पर मामला दर्ज किया गया था।

यह रिपोर्ट जगजीत सिंह चहल, जगदीश सिंह भोला और मनिंदर सिंह औलाख समेत आरोपियों के प्रवर्तन निदेशालय के सामने दिए गए इकबालिया बयानों पर आधारित है।

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