देश की खबरें | पता नहीं कि अमित शाह क्या बात कर रहे हैं: गोवा के मंत्री ने महादयी मुद्दे पर उनके बयान पर कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. गोवा के मंत्री नीलेश काबराल ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान का खंडन किया कि कर्नाटक के साथ महादयी नदी विवाद का दक्षिणी राज्य के पक्ष में समाधान हो गया है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का समर्थन भी किया।
पणजी, 30 जनवरी गोवा के मंत्री नीलेश काबराल ने सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस बयान का खंडन किया कि कर्नाटक के साथ महादयी नदी विवाद का दक्षिणी राज्य के पक्ष में समाधान हो गया है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत का समर्थन भी किया।
दोनों ही प्रदेश कई वर्षों से इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर एक-दूसरे से उलझे हुए हैं। गोवा ने कर्नाटक पर अक्सर समझौते की अनदेखी करते हुए एकतरफा आगे बढ़ने का आरोप लगाया है। दोनों ही प्रदेशों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकारें हैं।
शनिवार को कर्नाटक के बेलगावी में भाजपा की ‘जनसंकल्प यात्रा’ को संबोधित करते हुए शाह ने कहा था, ‘‘ मैं आप लोगों को बताना चाहता हूं कि भाजपा ने दोनों प्रदेशों के बीच लंबित इस विवाद का समाधान करते हुए महादयी का पानी कर्नाटक को दिया है और इस तरह यह सुनिश्चित किया कि कई जिलों के किसान लाभान्वित हों।’’
काबराल ने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ हमारे मुख्यमंत्री ने महादयी के पानी का रुख मोड़ने की सहमति नहीं दी है। मैं जानता हूं कि वह (प्रमोद सावंत) ऐसा कभी नहीं करेंगे। मुझे नहीं मालूम है कि केंद्रीय गृहमंत्री इस बारे में क्या कह रहे हैं।’’
जब उनसे पूछा गया कि शाह ने जो कुछ कहा है, क्या वह उसकी निंदा करते हैं तो उन्होंने कहा, ‘‘ वाकई। मैं बयान की निंदा करता हूं। हम बेसिन के भीतर पानी के उपयोग के विरूद्ध नहीं हैं, लेकिन हम कभी पानी को बाहर नहीं ले जाने देंगे।’’
काबराल ने कहा कि यदि (भाजपा का) केंद्रीय नेतृत्व महादयी मुद्दे पर गोवा का समर्थन नहीं करता है, तो उनका प्रदेश इस मुद्दे पर कानूनी रास्ता अख्तियार कर सकता है।
राज्य के लोक निर्माण विभाग के मंत्री काबराल ने कहा कि महादयी पर अंतर राज्यीय जल विवाद न्यायाधिकरण का फैसला ‘पेयजल’ के उद्देश्य के लिए था।
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे नहीं पता कि (शाह का) यह बयान कहां से आया है, जिसमें पानी का रुख सिंचाई उद्देश्यों के लिए मोड़ने की बात कही गई है ।’’
काबराल ने कहा कि गोवा का एक प्रतिनिधिमंडल कुछ हफ्ते पहले अमित शाह से मिलने गया था, क्योंकि केंद्रीय गृहमंत्री संविधान के अनुसार दो प्रदेशों के बीच विवाद के समाधान के लिए अधिकृत अधिकारी हैं।
उन्होंने कहा कि गोवा के सामने दो विकल्प है , पहला (भाजपा का) केंद्रीय नेतृत्व, और यदि वह नहीं सुनता है तो प्रदेश कानूनी रूप से लड़ सकता है।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)