विदेश की खबरें | न्यायाधीशों के खिलाफ हाल के अभियानों की परवाह नहीं : पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश

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इस्लामाबाद, 18 अप्रैल पाकिस्तान के प्रधान न्यायाधीश उमर अता बंदियाल ने सोमवार को कहा कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को अपने खिलाफ सोशल मीडिया अभियानों या राजनीतिक भाषणों की कोई परवाह नहीं है और वे केवल संविधान के संरक्षक के रूप में अपना कर्तव्य निभा रहे हैं।

देश के संविधान के अनुच्छेद 63-ए की व्याख्या के अनुरोध वाले राष्ट्रपति के संदर्भ (प्रेसीडेंशियल रेफरेन्स) की सुनवायी कर रहे न्यायमूर्ति बंदियाल ने इस बात पर हैरत जताई कि शीर्ष अदालत को राजनीतिक मामलों में क्यों पड़ना चाहिए जब राजनीतिक रैलियों में उसके फैसलों की आलोचना की जाती है।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘हम फैसला क्यों सुनायें जब 10-15 हजार लोग न्यायिक आदेशों की आलोचना करना शुरू कर देते हैं (...) अदालत आपकी राजनीतिक बहस में क्यों शामिल हो?’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम नेताओं से न्यायिक आदेशों का सार्वजनिक रूप से बचाव करने की उम्मीद करते हैं। कानून के शासन की रक्षा करना और सुनिश्चित करना अदालत की जिम्मेदारी है।’’

यह टिप्पणी ऐसे समय आयी है जब कुछ दिनों पहले पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने सार्वजनिक रूप से न्यायपालिका से यह बताने के लिए कहा था कि विपक्ष द्वारा नेशनल असेंबली में उनके खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव के जरिये उन्हें सत्ता से बाहर किए जाने से कुछ घंटे पहले, 9 अप्रैल की मध्यरात्रि को उसे अदालत के दरवाजे खोलने की आवश्यकता क्यों महसूस हुई।

प्रधान न्यायाधीश ने बिना किसी का नाम लिए टिप्पणी की कि शीर्ष अदालत का सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपना काम करने और संविधान की रक्षा करने के लिए हैं। अदालत को आपके राजनीतिक मामलों में क्यों शामिल होना चाहिए?’’

खान की इस शिकायत की ओर इशारा करते हुए कि अदालत के दरवाजे नौ अप्रैल को रात में क्यों खोले गए, न्यायमूर्ति बंदियाल ने कहा, ‘‘अदालत 24 घंटे काम करती हैं। किसी को भी अदालती कार्यवाही पर उंगली उठाने की जरूरत नहीं है।’’

प्रधान न्यायाधीश बंदियाल के नेतृत्व में न्यायमूर्ति इजाजुल अहसन, न्यायमूर्ति मजहर आलम खान मियांखेल, न्यायमूर्ति मुनीब अख्तर और न्यायमूर्ति जमाल खान मंडोखाइल सहित पांच सदस्यीय पीठ वर्तमान में नेशनल असेंबली को भंग करने के राष्ट्रपति के विवादास्पद कदम संबंधी मामले पर सुनवाई कर रही है।

प्रधान न्यायाधीश की टिप्पणी पर पूर्व सूचना मंत्री फवाद चौधरी ने कहा कि अदालत को अपने रुख पर 'पुनर्विचार' करने की जरूरत है। पूर्व प्रधानमंत्री खान के करीबी सहयोगी चौधरी ने ट्वीट किया, "दुनिया में कहीं भी अदालतें राजनीतिक सवाल और नीति तय नहीं करतीं, पाकिस्तान में अदालतों को राजनीति से दूर रहना सीखना चाहिए, आधी रात को काम करने वाली अदालतों को किसी भी तरह से सम्मान नहीं मिलेगा।’’

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