देश की खबरें | नवलखा को नजरबंद करने की अर्जी स्वीकार न करें : एनआईए

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मुंबई, पांच अप्रैल राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) ने मंगलवार को बंबई उच्च न्यायालय से एल्गार परिषद-माओवादी संबंध मामले जेल में बंद मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को कैद की जगह नजरबंद रखने संबंधी राहत न देने का आग्रह किया और कहा कि ऐसा किए जाने से मुश्किलें पैदा होंगी तथा उन्हें सोशल मीडिया का उपयोग करने से रोकने में दिक्कत होगी।

एनआईए के वकील अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह ने उस याचिका का विरोध किया जिसमें नवलखा ने खुद को नजरबंद रखे जाने का आग्रह किया है। सिंह ने कहा कि नवलखा द्वारा सोशल मीडिया या इंटरनेट का इस्तेमाल किया जाना घातक हो सकता है।

उन्होंने कहा कि अगर अदालत ने मामले की सुनवाई पूरी होने तक नवलखा को जेल से बाहर स्थानांतरित करने और घर में नजरबंद रखने की अनुमति दी तो महाराष्ट्र और केंद्र सरकार के अधिकारियों को इस तरह के आदेश को लागू करने में कई कठिनाइयां होंगी।

अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि यदि नवलखा की यह अर्जी स्वीकार की गई तो अदालत में कैदियों की ओर से ऐसे अनुरोधों की बाढ़ आ जाएगी। इस पर नवलखा के वकील युग चौधरी ने कहा कि इस तरह की आशंका निराधार है।

महाराष्ट्र सरकार ने भी नवलखा की याचिका का विरोध किया और न्यायमूर्ति एसबी शुक्रे तथा न्यायमूर्ति जीए सनप की पीठ से कहा कि जेल अधिकारी कार्यकर्ता को आवश्यक चिकित्सा देखभाल प्रदान करेंगे।

उच्च न्यायालय ने नवलखा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया।

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