देश की खबरें | टिक टॉक पर प्रतिबंध लगने से घरेलू लघु वीडियो कंपनियों को हो रहा फायदा
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नयी दिल्ली, 13 सितंबर टिक टॉक मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगने के दो महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भारत में लघु वीडियो ऐप का व्यवसाय दो रास्तों पर चलता दिखाई पड़ रहा है।
एक तो यह कि वीडियो बनाकर प्रसिद्धि हासिल कर चुके लोग अपने प्रशंसकों का आधार फिर से बनाने और पैसे कमाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
वहीं दूसरी तरफ, घरेलू ऐप निर्माताओं को ढेर सारे यूजर मिल रहे हैं।
बीटबॉक्स कलाकार जीजस मेहता (24) अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के लिए नया ठिकाना ढूंढ रहे हैं लेकिन भारतीय लघु वीडियो कंपनियां टिक टॉक पर लगे प्रतिबंध को अपने लिए अवसर के रूप में देख रही हैं।
भारत सरकार ने 29 जून को टिक टॉक समेत 59 चीनी ऐप पर पाबंदी लगा दी थी, जिसके कारण बीस करोड़ उपयोगकर्ता निराश हो गए थे और मेहता जैसे अनेक लोगों की आय काफी हद तक कम हो गई थी।
दस हजार रुपये से भी कम की नौकरी करने से एक महीना पहले मेहता ने पिछले साल जनवरी में टिक टॉक वीडियो बनाने का निर्णय किया था ताकि वह अपनी बीटबॉक्स (मुंह से विभिन्न प्रकार की ध्वनि निकालना) कला का प्रदर्शन कर सकें।
एक साल बाद मेहता को बीस लाख लोग फॉलो करने लगे थे और जो उन्होंने शौक के तौर पर शुरू किया था उससे उन्हें साठ हजार रुपये प्रतिमाह की आय होने लगी थी।
सूरत के रहने वाले मेहता ने कहा कि अब वह दिन नहीं रहे।
मेहता ने पीटीआई- से फोन पर कहा, “पिछले दो महीने अच्छे नहीं बीते। टिक टॉक मेरी आय का एक जरिया था। मैं ऑनलाइन कक्षा भी लेता हूं। टिक टॉक से ही मुझे हर महीने 60,000 रुपये की आय होती थी और अब 20,000 रुपये भी नहीं कमा पाता।”
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