गांधीनगर, 18 जुलाई वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को कहा कि यहां जी-20 बैठक में क्रिप्टो करेंसी के लिये एक व्यापक और समन्वित वैश्विक नीति तथा नियामकीय व्यवस्था बनाने को लेकर चर्चा हुई।
उन्होंने कहा कि जी-20 के सदस्य देशों ने अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने के लिये अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी। यह समूह दुनिया की प्रमुख विकसित और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं का अंतर-सरकारी मंच है।
सीतारमण गांधीनगर में जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर (एफएमसीबीजी) की तीसरी बैठक समाप्त होने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में यह कहा।
उन्होंने कहा कि बैठक में जी-20 के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंकों के गवर्नर ने लोगों और दुनिया की बेहतरी को प्राथमिकता देने का संकल्प लिया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय आर्थिक सहयोग बढ़ाने, सभी के लिये वैश्विक विकास को मजबूत करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूत, संतुलित तथा समावेशी वृद्धि को लेकर प्रतिबद्धता दोहारायी।
सीतारमण ने कहा, ‘‘क्रिप्टो करेंसी के लिये एक व्यापक और समन्वित वैश्विक नीति तथा नियामकीय व्यवस्था बनाने को लेकर चर्चा हुई।’’ उन्होंने यह भी कहा कि जी-20 की अध्यक्षता कर रहे भारत ने समूह के समक्ष डिजिटल ढांचागत सुविधा के मुद्दे को रखा है।
वित्त मंत्री ने कहा, ‘‘भारत ने अपनी अध्यक्षता में डिजिटल ढांचागत सुविधा के एजेंडा को जी-20 की बैठक में उठाया। सदस्यों ने वित्तीय समावेश और उत्पादकता के लाभ को तेजी से आगे बढ़ाने में डिजिटल ढांचागत सुविधा (डीपीआई) की महत्वपूर्ण भूमिका का समर्थन किया।’’
सीतारमण ने कहा कि कर्ज को लेकर बिगड़ती स्थिति पर भी जी-20 सदस्य देशों ने विचार-विमर्श किया। बैठक में खराब होती कर्ज स्थिति को प्रभावी ढंग से निपटने के लिये बहुपक्षीय समन्वय को मजबूत करने और ऋण समस्या से जूझ रहे देशों के लिये समन्वित उपाय किये जाने पर बातचीत हुई।
कर्ज समाधान के लिये साझा व्यवस्था तैयार करने पर चीन की प्रतिक्रिया के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “चीन का रुख उत्साहजनक था।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)













QuickLY