ताजा खबरें | डिजिटल वैयक्तिक डाटा संरक्षण विधेयक रास में ध्वनिमत से पारित
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नयी दिल्ली, नौ अगस्त डाटा सुरक्षा की जवाबदेही निर्धारित करने के प्रावधान वाले ‘डिजिटल वैयक्तिक डाटा संरक्षण विधेयक, 2023’ को बुधवार को संसद ने मंजूरी दे दी।
उच्च सदन में आज ध्वनिमत से पारित इस विधेयक में डिजिटल व्यक्तिगत डाटा के संरक्षण तथा व्यक्तिगत डाटा का संवर्द्धन करने वाले निकायों पर साधारण और कुछ मामलों में विशेष बाध्यता लागू करने का उपबंध किया गया है। लोकसभा में यह विधेयक सात अगस्त को पारित हो चुका है।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि बीते नौ साल में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने डिजिटल माध्यम से आवश्यक सेवाओं को घर घर पहुंचाया है और इसकी पूरी दुनिया में चर्चा है।
उन्होंने कहा कि डिजिटल लेन-देन का महत्व सभी ने देखा है और यह हमारे जीवन की जरूरत बन गया है। उन्होंने कहा, ‘‘90 करोड़ भारतीय इंटरनेट से जुड़ गए हैं और छोटे-छोटे गांव तक डिजिटल सुविधा पहुंच गई है। ऐसे में डिजिटल डेटा की सुरक्षा अत्यंत महत्वपूर्ण है जिसे देखते हुए यह विधेयक लाया गया है।’’
जब वैष्णव अपनी बात रख रहे थे उस समय विपक्षी सदस्य सदन में नहीं थे। मणिपुर मुद्दे पर नियम 267 के तहत राज्यसभा में चर्चा कराने और प्रधानमंत्री के बयान की मांग कर रहे कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों के सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन किया था।
उन्होंने कहा ‘‘देश के 140 करोड़ लोगों के जीवन से जुड़ा यह अहम पहलू विपक्ष के लिए महत्वपूर्ण नहीं है, यह बात विपक्ष की खाली बेंचों से जाहिर हो जाती है।’’
विधेयक के बारे में वैष्णव ने कहा कि पिछले कई वर्षों में संसद की स्थायी समिति सहित अनेक मंचों पर कई घंटों तक इस पर चर्चा हुई है। उन्होंने कहा कि 48 संगठनों तथा 39 विभागों एवं मंत्रालयों ने इस पर चर्चा की और इनसे 24 हजार सुझाव तथा विचार प्राप्त हुए।
उन्होंने कहा कि विधेयक में डेटा सुरक्षा के लिए समुचित प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने कहा कि जो भी डेटा लिया जाएगा, उसका कानून के अनुसार, निर्दिष्ट काम के लिए निश्चित उपयोग किया जाएगा, उपयोग के बाद डेटा को डिलीट करना होगा, डेटा को निजी रखने के लिए समस्त उपाय किए जाएंगे तथा डेटा लेने वाले की यह जिम्मेदारी होगी कि वह कानून के अनुसार डेटा की सुरक्षा करेगा।
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का डाटा, किसी प्लेटफार्म या ऐप पर आने वाला डाटा अब कानून के तहत आयेगा। इसमें कहा गया है कि इस डाटा को जिस उद्देश्य के लिए लिया जाए, उसी उद्देश्य से उपयोग किया जाए।
उन्होंने बताया कि इसमें प्रावधान किया गया है कि जितना डाटा चाहिए, उतना ही लिया जाए और किसी व्यक्ति के निजी डाटा में बदलाव आने पर उसके अनुरूप ही अनुपालन किया जाए। विधेयक के उद्देश्य में कहा गया कि जितने समय तक डाटा को रखना चाहिए, उतने ही समय तक रखा जाए।
वैष्णव ने कहा कि इसके माध्यम से डाटा सुरक्षा की जवाबदेही निर्धारित की गई है।
उन्होंने कहा कि इसमें सोशल मीडिया पर डेटा डालने के अनिच्छुक लोगों को इस पर फैसला करने का अधिकार होगा।
मंत्री ने कहा कि एक डेटा संरक्षण बोर्ड बनेगा जो डेटा संबंधी पूरी व्यवस्था को देखेगा। उन्होंने कहा कि बोर्ड में विशेषज्ञ रहेंगे और बोर्ड कानून के माध्यम से काम करेगा एवं स्वतंत्र होगा।
वैष्णव ने कहा कि यह पहला विधेयक है जिसमें पूरी तरह नारी शक्ति को सम्मान दिया गया है और इसमें ‘ही’ की जगह ‘शी’ का उपयोग किया गया है। इसे बेहद सरल में तैयार किया गया है।
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(The above story first appeared on LatestLY on Aug 09, 2023 06:24 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

