जरुरी जानकारी | डिजिटल मंचों को संप्रभु राष्ट्रों की चिंताओं के प्रति होना चाहिये जिम्मेदार, जवाबदेह: प्रसाद

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर के डिजिटल मंचों को नागरिकों की सूचनाओं की गोपनीयता व सुरक्षा को लेकर संप्रभु राष्ट्रों की चिंताओं के प्रति जिम्मेदार, जवाबदेह तथा संवेदनशील होना चाहिये।

नयी दिल्ली, 22 जुलाई केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बुधवार को कहा कि दुनिया भर के डिजिटल मंचों को नागरिकों की सूचनाओं की गोपनीयता व सुरक्षा को लेकर संप्रभु राष्ट्रों की चिंताओं के प्रति जिम्मेदार, जवाबदेह तथा संवेदनशील होना चाहिये।

एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, प्रसाद ने जी 20 डिजिटल अर्थव्यवस्था मंत्री बैठक को संबोधित करते हुए सूचनाओं से संबंधित मुद्दों तथा नागरिकों की सुरक्षा व सूचनाओं की गोपनीयता संरक्षित रखने के देशों के संप्रभु अधिकारों पर जोर दिया।

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उन्होंने कहा कि भारत जल्द ही एक मजबूत व्यक्तिगत डेटा संरक्षण कानून लागू करेगा जो न केवल नागरिकों से जुड़ी सूचनाओं की गोपनीयता संबंधी चिंताओं को दूर करेगा बल्कि नवाचार व आर्थिक विकास के लिये डेटा की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

मंत्री ने कहा कि कई देशों में मौजूद डिजिटल मंच विश्वसनीय, सुरक्षित और सुरक्षित होने चाहिए। उन्होंने कहा, "जहां तक सुरक्षा, रक्षा और सूचनाओं की गोपनीयता की बात है, डिजिटल मंचों को संप्रभु राष्ट्रों की चिंताओं को लेकर जिम्मेदार, जवाबदेह और संवेदनशील होने की जरूरत है।"

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प्रसाद ने जी 20 देशों के डिजिटल मंत्रियों से कहा "यह स्वीकार करने का समय है कि दुनिया में कहीं भी डिजिटल मंचों को रक्षा, गोपनीयता और नागरिकों की सुरक्षा सहित देशों की संप्रभु चिंताओं के प्रति उत्तरदायी व जवाबदेह होना चाहिये।"

प्रसाद ने अपने संबोधन के दौरान कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में मदद करने वाले भारत के डिजिटल नवाचारों को साझा किया। उन्होंने मरीजों की निगरानी के लिये आरोग्य सेतु मोबाइल ऐप, जियो-फेंसिंग प्रणाली और कोविड-19 सावधान बल्क मैसेजिंग सिस्टम जैसी पहलों की जानकारी दी।

उन्होंने वैश्विक महामारी के मद्देनजर एक लचीली वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ करीबी एकीकरण समेत देश को निवेश के लिये एक आकर्षक गंतव्य बनाने का दृष्टिकोण साझा किया।

प्रसाद ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि कैसे डिजिटल तकनीक ने इस संकट के दौरान समाज के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को राहत देने में भारत सरकार की मदद की।

विज्ञप्ति में कहा गया कि भारत के डिजिटल नवोन्मेष जैसे कि प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) और डिजिटल भुगतान का उपयोग करना, आदि से सबसे कमजोर वर्ग को भी लॉकडाउन के दौरान विभिन्न वित्तीय राहत प्रदान की गयी।

समावेशी वृद्धि और विकास के लिये कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) जैसी उभरती हुई तकनीकों का लाभ उठाने के लिये भारत की प्रतिबद्धता जताते हुए प्रसाद ने विशेष रूप से स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा में ऐसी भरोसेमंद एआई प्रणाली के निर्माण की आवश्यकता को रेखांकित किया, जो समाज को बदल सकते हैं।

प्रसाद ने यह भी कहा कि डिजिटल अर्थव्यवस्था को डेटा अर्थव्यवस्था के साथ-साथ चलना चाहिये। उन्होंने कहा, "हाँ, हम डेटा इनोवेशन, डेटा क्रॉसफ्लो के मुद्दे को समझते हैं, लेकिन हमें डेटा पर संप्रभुता को स्वीकार करने की भी आवश्यकता है।’’

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