देश की खबरें | ‘डिजिटल अरेस्ट’ प्रकरण: ईडी ने कहा कि फिनटेक कंपनियों की ‘बड़ी चूक’ सामने आयी
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नयी दिल्ली, 27 जनवरी प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को कहा कि उसे एक ‘डिजिटल अरेस्ट’ मामले में धनशोधन जांच के तहत कई ‘फिनटेक’ (वित्तीय प्रौद्योगिकी) कंपनियों की ‘कई बड़ी चूक’ का पता चला है। इस मामले में दो आरोपियों को पकड़ा गया है।
यह धनशोधन जांच चेन्नई पुलिस की एक प्राथमिकी का संज्ञान लेकर शुरू की गयी। एक बुजुर्ग ने चेन्नई पुलिस से शिकायत की थी कि साइबर अपराधियों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर उनसे 33 लाख रुपये ऐंठ लिये।
‘डिजिटल अरेस्ट’ एक साइबर घोटाला है, जिसमें धोखेबाज फोन या वीडियो कॉल पर अपने को कानून प्रवर्तन अधिकारियों के रूप में पेश कर पीड़ितों पर झूठा आरोप लगाते हैं और उन्हें व्यक्तिगत जानकारी या पैसे देने के लिए धमकाते हैं। पीड़ितों को बताया जाता है कि अगर वे उनकी बात नहीं मानते हैं तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है।
ईडी ने एक बयान में कहा कि उसने इस जांच के तहत पश्चिम बंगाल, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र में 30 से अधिक स्थानों पर ‘सघन’ तलाशी ली।
उसने कहा कि उसके सामने कई फिनटेक कंपनियों की ‘कई बड़ी चूक’ भी सामने आयीं, जो ‘अपने ग्राहक को जानें (केवाईसी)’ मानदंडों का पालन करने में ‘विफल’ रहीं और जिन्होंने ‘फर्जी’ संस्थाओं तथा व्यक्तियों से नकदी स्वीकार की।
एजेंसी ने कहा कि सैकड़ों करोड़ रुपये की ये नकदी डिजिटल या साइबर अपराधों से प्राप्त दागी धनराशि होने का संदेह है।
ईडी ने कहा, ‘‘इन फिनटेक कंपनियों, उनके वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और संबंधित बैंक खातों की भूमिका की जांच की जा रही है।’’
साइबर अपराधी एक ऐसी प्रणाली अपना रहे हैं जहां ‘म्यूल’ खातों से निकाली गई नकदी को क्रिप्टोकरेंसी में परिवर्तित कर दिया जाता है और उसे उन संस्थाओं को स्थानांतरित कर दिया जाता था, जिनके विदेश में स्थित होने का संदेह है।
‘म्यूल खाता’ ऐसा खाता होता है जिसका उपयोग धोखेबाज ठगी की धनराशि को जमा करने के लिए करते हैं। ये खाते भोले-भाले निर्दोष लोगों के होते हैं।
एजेंसी के अनुसार, विभिन्न डिजिटल धोखाधड़ी योजनाओं से अर्जित धनराशि की बड़ी मात्रा इस पद्धति के माध्यम से भेजी गई।
ईडी ने कहा कि जांच में पाया गया कि आरोपी फिनटेक सेवाएं दे रही कंपनियों के बैंक खातों में नकदी जमा करने के लिए नकदी जमा मशीनों का दुरुपयोग करते हैं।
उसने कहा, ‘‘इसके बाद इन धनराशियों को अलग-अलग खातों में भेजा जाता है, जिससे आरोपी क्रिप्टोकरेंसी प्राप्त कर पायें। इस क्रिप्टोकरेंसी का इस्तेमाल कथित तौर पर विदेशी फोन नंबरों का उपयोग करने वाले साथियों की मदद से अपराध की कमाई को छिपाने और विदेश में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता है।’’
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